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नीमच मे कुत्तों का आंतक- रातभर भौंक-भौंककर लोगों की नींद खराब करते और दिन मे जब मर्जी हो किसी को काटने में भी देरी नहीं करते

नीमच। मध्यप्रदेश, नगरपालिका ने लगता है नीमच शहर कुत्तों के हवाले कर दिया है। हर गली, मोहल्ले, बाजारों में कुत्तों के झुण्ड घुमते दिखाई देते हैं। ये कुत्ते अपनी गली मोहल्ले के राजा बने हुए हैं। रातभर भौंक-भौंककर लोगों की नींद तो खराब करते ही हैं परन्तु दिन हो या रात जब मर्जी हो किसी को काटने में भी देरी नहीं करते। ऐसा नहीं है कि ये केवल बाहरी लोगों को ही काटते हैं, अपने गली मोहल्ले वालों को भी अपने खौफ से जब तब अवगत कराते रहते हैं।
उक्त आषय का बयान जारी करते हुए नपा के पूर्व स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष व कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा ने कहा कि नीमच नगरपालिका ने कुत्तों की नसबंदी के नाम पर लाखों रूपए खर्च कर दिये हैं मगर हर गली मोहल्ले में कुत्तों के पिल्ले घुमते हुए नजर आते हैं। कुत्तों की घुमती हुई टोलियां नगरपालिका के भ्रष्टाचार की कहानी कह रही है। नगरपालिका समय समय पर इन पर नियंत्रण के लिए कई घोषणाएं तो करती हैं परन्तु केवल रटे रटाए बयान रहते हैं नतीजा सिफर और केवल सिफर।
डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा ने कहा कि जरा सा ध्यान नहीं रहे तो कुत्ते के पिल्ले किसी भी गाडी के नीचे आ जाते हैं। कुत्ते चाहे आम आदमी पैदल हो या गाडी पर उनके पीछे भौंकते हुए दौडते हैं और काटने में भी देर नहीं करते। केवल जिला चिकित्सालय में ही रोजाना कुत्तों के काटने के 8 से 10 केस आते हैं और रोजाना 40 से 50 व्यक्ति कुत्ता काटने के पीडित इंजेक्षन लगवाने आते हैं। औसतन हजार, बारह सौ इन्जेक्षन प्रतिमाह लगाए जाते हैं। इसके अलावा निजी चिकित्सालयों में जो इन्जेक्षन लगाते हैं वह अलग हैं जो लगभग इतनी ही संख्या में लगाए जा रहे हैं, जिनकी लागत प्रति इंजेक्षन चार सौ रूपए आती है।
नगरपालिका का मेनका गांधी के जीव हिंसा आन्दोलन की आड में लाखों रूपया कुत्तों की नसबंदी को लेकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ रहा है। लोग त्रस्त हैं, नगरपालिका मस्त है। जीव हिंसा रोकने के नाम पर निष्क्रिय बनी नगरपालिका मानव हिंसा करवा रही है।

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