आउटसोर्स भर्ती में अनियमितता के आरोपों के बाद मंदसौर सीएमएचओ डॉ. जीएस चौहान निलंबित, कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर उज्जैन कमिश्नर ने की कार्रवाई, डॉ. आरके द्विवेदी को सौंपा प्रभारी सीएमएचओ का दायित्व
मंदसौर। मध्यप्रदेश, मंदसौर जिले में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं, आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितता, नियम विरुद्ध स्थानांतरण सहित अन्य गंभीर शिकायतों के मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. गोविंदसिंह (जीएस) चौहान को उज्जैन संभागायुक्त ने निलंबित कर दिया है। उनके स्थान पर डॉ. आरके द्विवेदी को प्रभारी सीएमएचओ का दायित्व सौंपा गया है।
जानकारी के अनुसार, कलेक्टर अदिति गर्ग द्वारा मामले की जांच करवाकर 21 जुलाई 2026 को सीएमएचओ डॉ. चौहान के संबंध में एक विस्तृत प्रतिवेदन उज्जैन संभागायुक्त को भेजा गया था। प्रतिवेदन में स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित अनियमितताओं, चिकित्सा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण, आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार के आरोपों, पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और मनमानी सहित विभिन्न बिंदुओं का उल्लेख किया गया था।
जांच के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को कथित रूप से लंबे समय तक लंबित रखने, पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट से संबंधित दस्तावेज जांच दल को उपलब्ध नहीं कराने तथा निजी अस्पतालों के पंजीयन से जुड़े रिकॉर्ड में भी अनियमितताओं की बात सामने आने का उल्लेख किया गया है। जांच रिपोर्ट में सीएमएचओ से जुड़े एक कथित रिश्तेदार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच दल द्वारा मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
66 पदों की स्वीकृति, 311 नियुक्तियों का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर लगाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर स्तर से 66 पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी गई थी, जबकि कथित तौर पर 311 लोगों को नियुक्ति दे दी गई। इस तरह स्वीकृत पदों से 245 अधिक नियुक्तियां किए जाने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की पूरी पुष्टि जांच एवं संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकेगी।
भर्ती प्रक्रिया में कुछ बिचौलियों और कथित दलालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मंदसौर जिले के सुवासरा, गरोठ, भानपुरा और मल्हारगढ़ क्षेत्र में सक्रिय कुछ लोगों के नाम इस मामले में सामने आए हैं। आरोप है कि बेरोजगार युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रूप से 70 से 80 हजार रुपये या उससे अधिक राशि लिए जाने की शिकायतें भी जांच के दौरान सामने आई हैं।
बड़े रैकेट की आशंका, निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में कुछ लोगों के माध्यम से नियुक्तियां करवाने और पैसे के लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो पूरे मामले में बड़ी आर्थिक अनियमितता सामने आ सकती है। इसी कारण मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग उठ रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्वीकृत पदों से अधिक नियुक्तियां किन परिस्थितियों में की गईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
प्रशासन की जांच में शामिल शिकायतकर्ताओं एवं अन्य संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर भी मामले की जांच आगे बढ़ने की बात कही जा रही है। वहीं, मामले से जुड़े आरोपों में कुछ राजनीतिक एवं प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने की चर्चा भी सामने आई है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया गया है कि मामला विधानसभा स्तर तक पहुंचने और मीडिया एवं सोशल मीडिया में खबरें सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच तेज की। सुवासरा विधायक हरदीपसिंह डंग द्वारा भी सीएमएचओ की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत किए जाने का उल्लेख प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों में होने की बात सामने आई है।
आपराधिक प्रकरण दर्ज कर पूरे नेटवर्क की जांच की मांग
मामले में अब यह मांग उठ रही है कि यदि जांच में भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्ति और पैसों के लेन-देन के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ कथित बिचौलियों और दलालों की भूमिका की भी जांच की जाए। साथ ही, जिन बेरोजगार युवाओं से नौकरी के नाम पर कथित रूप से राशि लिए जाने की शिकायत है, उनके बयान दर्ज कर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जाए।
फिलहाल सीएमएचओ डॉ. जीएस चौहान के निलंबन के बाद मामले की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया में कितनी अनियमितताएं हुईं और इसमें कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।
आउटसोर्स भर्ती में अनियमितता को लेकर विधायक डंग ने उठाए थे सवाल
मंदसौर। स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर सुवासरा विधायक हरदीपसिंह डंग ने 15 मई 2025 को कलेक्टर को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। पत्र में सीएमएचओ के रिश्तेदार बताए जा रहे जयदीप पर कथित रूप से लोगों से राशि लेकर बिना विधिवत आदेश के अस्पतालों में कार्य करवाने के आरोप लगाए गए थे।
विधायक ने मामले में कथित फर्जी नियुक्तियों, चिकित्सकों पर दबाव और स्वास्थ्य विभाग में अनियमितताओं की जांच की मांग करते हुए दोषियों एवं उन्हें संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई की मांग की थी।