बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने राष्ट्रीय मीडिया के सामने ‘दिमागी नक्सली’ पर ‘छिपकली’ वाली कहानी सुना दी
पीएम मोदी असाधारण व्यक्तित्व के धनी, ‘मन की बात’ के जरिए जनता से करते हैं संवादः बाबा बागेश्वर धाम
जेन-ज़ेड, वंदे मातरम, जातिवाद-क्षेत्रवाद और युवाओं की भूमिका सहित विभिन्न मुद्दों पर रखे विचार;“दिमागी नक्सली पर ‘छिपकली’ वाली कहानी सुना दी”
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर के पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने एक राष्ट्रीय मीडिया से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी असाधारण व्यक्तित्व के धनी हैं और ‘मन की बात’ के माध्यम से देश की जनता से सीधे संवाद करते हैं। जेन-ज़ेड को लेकर उन्होंने कहा, “जेनरेशन सड़क तक न जाए, सरकार जेनरेशन तक जाए।” उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं और उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है। युवाओं को अपनी बात रखने और आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।
देश की रक्षा युवाओं के हाथ में
धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि देश की रक्षा और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। युवाओं को देश के प्रति जिम्मेदारी और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में जातिवाद और क्षेत्रवाद के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। समाज को बांटने वाली सोच देश की एकता के लिए नुकसानदायक है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर भी रखी बात
‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही बहस पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रभक्ति से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् नहीं गाने वाला देशद्रोही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश में दंगा और अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं। ऐसे तत्वों से समाज को सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को सर्वाेच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
“धर्म का धंधा नहीं होना चाहिए”
धर्म को लेकर धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा, “धर्म का धंधा नहीं होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि धर्म का उद्देश्य समाज में संस्कार, सद्भाव, सेवा और मानवता की भावना को बढ़ावा देना होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
“दिमागी नक्सली पर ‘छिपकली’ वाली कहानी सुना दी”
बातचीत के दौरान धीरेन्द्र शास्त्री ने मानसिक भ्रम और उसके प्रभाव को समझाने के लिए एक रोचक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति उनके पास आया और कहने लगा, “मेरे शरीर के अंदर छिपकली दौड़ रही है।” बाबा बागेश्वर ने कहानी मे सुनाया की जब उससे पूछा गया कि छिपकली उसके शरीर के अंदर कैसे पहुंची, तो उसने बताया कि जब वह सो रहा था, तब उसका मुंह खुला हुआ था और उसी दौरान छिपकली उसके मुंह के रास्ते शरीर के अंदर चली गई। इसके बाद उसे लगातार ऐसा महसूस हो रहा था कि छिपकली उसके शरीर के अंदर दौड़ रही है।
बाबाजी ने बताया कि उस व्यक्ति को समझाने के बावजूद वह अपनी बात पर अड़ा रहा। इसके बाद उसके भ्रम को दूर करने के लिए उसे इलाज का भरोसा दिलाया गया। पानी का इंजेक्शन लगाया गया और ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई गई। उसे बताया गया कि इलाज के दौरान छिपकली को बाहर निकाला जा रहा है।
कुछ देर बाद उसके मुंह के पास एक मरी हुई छिपकली रखकर उसे बताया गया कि “छिपकली बाहर निकल गई है।” यह सुनकर व्यक्ति संतुष्ट हो गया और उसे विश्वास हो गया कि अब उसके शरीर के अंदर छिपकली नहीं है।
बाद में उसे बताया गया कि उसके शरीर में वास्तव में कोई छिपकली गई ही नहीं थी और यह पूरी प्रक्रिया उसके मन में बैठे भ्रम को दूर करने के लिए की गई थी। धीरेन्द्र शास्त्री ने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया के लिए उस व्यक्ति से पांच हजार रुपये भी ले लिए गए थे।
बाबा बागेश्वर धाम वाले ने कहानी के माध्यम से उन्होंने मानसिक भ्रम की स्थिति को समझाते हुए कहा, “सोच एक अंदर की होती है और एक बाहर की होती है।” उन्होंने बताया कि कई बार मन में बैठा भ्रम व्यक्ति के लिए वास्तविकता बन जाता है और वह उसी को सच मानने लगता है। ऐसे में उसकी मानसिक स्थिति को समझना और सही तरीके से उसे उस भ्रम से बाहर निकालना जरूरी होता है।