मध्यप्रदेश में दिव्यांगजन को 1875 रुपये प्रतिमाह पेंशन, उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है-एडवोकेट विजयवर्गीय
इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते कोर्ट ने शासन से पूछा है कि प्रदेश में लाड़ली बहनों को 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं तो फिर दिव्यांगों को सिर्फ 600 क्यों ? एडवोकेट मनीष विजयवर्गीय द्वारा दायर इस जनहित याचिका में दिव्यांगों को दी जाने वाली पेंशन राशि बढ़ाए जाने की मांग करते कोर्ट को बताया कि प्रदेश में दिव्यांगों को सिर्फ 600 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है, जबकि दिव्यांगों अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 24 के अनुसार दिव्यांगों को प्रदेश में चल रही विभिन्न योजनाओं से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक राशि पेंशन के रूप में दी जाना चाहिए। शासन प्रदेश में लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह दे रहा है। इस हिसाब से प्रदेश में दिव्यांगों को 1875 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है कि प्रदेश में दिव्यांगों को 600/- क्यों ? इसके साथ ही याचिका सुनवाई की अगली तारीख चार सप्ताह बाद की नियत की गई है।
शासन प्रदेश में लाडली बहना योजना के अंतर्गत महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह दे रहा है। इस हिसाब से प्रदेश में दिव्यांगजन को 1875 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। याचिकाकर्ता के आरंभिक तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
केंद्र और राज्य के बीच झूल रहा है मामला
- याचिकाकर्ता दिव्यांगजन को दी जाने वाली पेंशन की राशि में बढ़ोतरी की मांग करते हुए वर्ष 2023 में भी हाई कोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत कर चुके हैं।
- उस जनहित याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा था कि वे राज्य शासन के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करें।
- राज्य शासन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 24 के प्रविधानों के तहत अभ्यावेदन का निराकरण करें।
- एडवोकेट विजयवर्गीय ने बताया कि हमने शासन के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था।
- लेकिन राज्य शासन ने यह कहते हुए दिव्यांगजन की पेंशन में बढ़ोतरी से इंकार कर दिया कि यह केंद्र की योजना है, हम कुछ नहीं कर सकते।
अन्य राज्यों में कई गुना ज्यादा है पेंशन
- एडवोकेट विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश में सिर्फ 6 से 18 आयुवर्ग के दिव्यांगजन को ही पेंशन की पात्रता है। हमने अभ्यावेदन में मांग की थी कि 0 से 6 आयुवर्ग के दिव्यांगजन को भी इसमें शामिल किया जाए।
- शासन ने यह कहते हुए इससे इंकार कर दिया था कि छह वर्ष तक के दिव्यांग अभिभावकों पर आश्रित रहते हैं, इसलिए उन्हें पेंशन नहीं दी जा सकती।
- एडवोकेट विजयवर्गीय ने बताया कि गोआ, हरियाणा सहित कई प्रदेश हैं जहां दिव्यांगजन को मप्र के मुकाबले कई गुना ज्यादा पेंशन दी जा रही है। कुछ राज्यों में तो यह चार हजार रुपये प्रतिमाह तक है।
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- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 24, कानूनी प्रावधान (धारा 24): उपर्युक्त सरकार (राज्य/केंद्र) दिव्यांगजनों के लिए ऐसी नीतियां बनाएगी जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए और उन्हें, सामान्य नागरिकों के लिए चल रही समान योजनाओं की तुलना में 25% अतिरिक्त लाभ या पेंशन सुनिश्चित करेगी।
- मध्य प्रदेश का संदर्भ: हालिया खबरों के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि जब लाड़ली बहना योजना के तहत ₹1500 दिए जा रहे हैं, तो दिव्यांगजनों को केवल ₹600 (25% अतिरिक्त नियम के विपरीत) पेंशन क्यों दी जा रही है।
- उद्देश्य: इस प्रावधान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को जीवनयापन के लिए अधिक सहायता प्रदान करना है ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें।
निष्कर्ष: यदि कोई राज्य सरकार दिव्यांगों को सामान्य योजनाओं के बराबर या उससे कम पेंशन दे रही है, तो यह आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 की धारा 24 के तहत दिव्यांगजनों के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।