ब्रेकिंग
अवैध शराब के साथ आरोपी गिरफ्तार, मंदसौर कोतवाली पुलिस ने 18 क्वार्टर देशी शराब जब्त मध्यप्रदेश ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए द... एमडी तस्करी मामले में बाबू सिंधी गिरफ्तार, अब तक 7 आरोपी सलाखों के पीछे, नये के विरूद्ध कोतवाली पुलि... मध्यप्रदेश विधानसभा कार्य मंत्रणा समिति की बैठक संपन्न, विधानसभा अध्यक्ष से शिष्टाचार भेंट, आगामी वि... मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में भीषण हादसा: सेल्फी लेते समय ट्रक ने छह दोस्तों को कुचला, सभी की मौ... गधों को खिलाए गुलाब जामुन, अगले दिन भोपाल में हुई बारिश; मानसून मनाने की लोक मान्यता फिर चर्चा में मंदसौर कोतवाली पुलिस की कार्रवाईः तीन आरोपियों से धारदार छुरे जब्त, आर्म्स एक्ट में प्रकरण दर्ज श्री पशुपतिनाथ मंदिर का महाघंटा खामोश, फिर गूंज सुनने को भक्तों में बढ़ रही लालसा, मंदिर प्रबंध समिति... भानपुरा में अमानक खाद बेचने पर मामला दर्ज, गुजरात कि सुप्रीम कामधेनु फर्टिलाइजर प्राइवेट लिमिटेड कम्... फरार अरमान सुरजनी गिरफ्तार, इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा पूर्व में चार पकड़ेगें जा चुके

मध्य प्रदेश में दोनों दलों के बीच कड़ी टक्कर है और चुनावी नतीजे एक तरफ नहीं रहने वाले। दोनों दलों में पांच से 10 सीटों का ही अंतर रहेगा।

भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही सियासी दलों ने कमजोर कड़ी की तलाश शुरू कर दी है। इसके पीछे बड़ी वजह किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत न मिलने का अनुमान है।

राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए 17 नवंबर को मतदान हो चुका है और नतीजा तीन दिसंबर को आने हैं। किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 116 विधायकों की जरूरत होगी। बहुमत का आंकड़ा यही है।
अब तक यही अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों दलों के बीच कड़ी टक्कर है और चुनावी नतीजे एक तरफ नहीं रहने वाले। दोनों दलों में पांच से 10 सीटों का ही अंतर रहेगा।
सट्टा बाजार भी लगभग यही कहानी कह रहा है और इसी का नतीजा है कि दोनों दल आगामी स्थितियों को लेकर चिंतित है।
बात अगर पिछले विधानसभा चुनाव की करें तो किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस 114 सीट लेने के साथ बढ़त में थी, जबकि भाजपा को 109 स्थान पर ही जीत मिली थी। सात स्थानों पर सपा, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। अन्य का कांग्रेस को साथ मिला था और उसकी सरकार भी बनी।
कांग्रेस की सरकार कमलनाथ के नेतृत्व में 15 महीने ही चल पाई और ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी के चलते 22 विधायकों ने बगावत की और कमलनाथ की सरकार गिर गई । यह घटनाक्रम दोनों ही राजनीतिक दलों को बेहतर तरीके से याद है लिहाजा किसी भी दल को पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थिति में उन्होंने दूसरे दल के अलावा अन्य में कमजोर कड़ी की तलाश तेज कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बहुमत न मिलने या बहुमत से कुछ अंक ज्यादा निकलने के बाद भी राजनीतिक दलों की कमजोर कड़ी या यूं कहें विभीषण की तलाश में कोई पीछे नहीं रहने वाला। यह बात अलग है कि कमलनाथ लगातार दावा करते रहे हैं कि अगर वह चाहते तो अपनी सरकार बचा लेते। उनके पास भी सौदेबाजी के अवसर थे, परंतु इस बार लगता है कि वे कोई भी मौका अपने हाथ से जाने नहीं देंगे।
इसके बावजूद आने वाले दिन राज्य की सियासत में बड़े घटनाक्रम का गवाह बनेंगे, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

#Khas khabar

Leave A Reply

Your email address will not be published.