सागर में जहरीली शराब कांड के बीच आबकारी विभाग में फेरबदल, मंजूषा सोनी को विदेशी मदिरा भंडार के प्रभारी पद से हटायाए लेकिन सागर में ही नई जिम्मेदारी
20 साल से सागर में जमी आबकारी अधिकारी मंजूषा सोनी को पद से हटाया, लेकिन सागर से नहीं, जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासनिक फेरबदल पर उठे सवालकृक्या केवल जिम्मेदारी बदलना ही पर्याप्त कार्रवाई?
भोपाल/ सागार । आबकारी आयुक्त के 8 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार सहायक जिला आबकारी अधिकारी मंजूषा सोनी को प्रभारी अधिकारीए विदेशी मदिरा भंडार सागर के पद से हटाकर सहायक जिला आबकारी अधिकारीए कार्यालय संभागीय उड़नदस्ताए संभाग सागर में पदस्थ किया गया है। वहीं रामकुमार सूत्रकार को विदेशी मदिरा भंडार सागर के प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद आबकारी विभाग में कार्रवाई का दौर जारी है। इसी बीच करीब 20 वर्षों से सागर में पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी मंजूषा सोनी की जिम्मेदारी बदल दी गई है। आबकारी आयुक्त के आदेश के अनुसार उन्हें विदेशी मदिरा भंडार सागर (एफएल-10) के प्रभारी पद से हटाकर सहायक जिला आबकारी अधिकारी, संभागीय उड़नदस्ता कार्यालय, संभाग सागर में पदस्थ किया गया है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अधिकारी को पद से हटाया गया है, तो सागर से बाहर क्यों नहीं किया गया? करीब दो दशक से एक ही जिले में पदस्थ रहने को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं।
20 साल तक एक ही जिले में पदस्थ रहने का कारण क्या?
सवाल यह भी है कि आखिर ऐसा क्या कारण रहा कि एक अधिकारी करीब 20 वर्षों तक सागर में ही अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालती रहीं? क्या विभाग में लंबे समय तक एक ही जिले में पदस्थ रहने की कोई विशेष व्यवस्था थी? यदि थी, तो उसके आधार क्या थे और इसकी समीक्षा किस स्तर पर हुई? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और शासन की ओर से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
जहरीली शराब कांड के बाद जवाबदेही का सवाल
बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब की घटना के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ा है। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग समय पर अलग बताई गई है और प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं। ऐसे में सबसे अहम सवाल जवाबदेही का है। यदि जांच में आबकारी विभाग की लापरवाही या निगरानी में चूक सामने आती है, तो क्या केवल पद और जिम्मेदारी बदल देना पर्याप्त कार्रवाई मानी जाएगी? सरकार ने इस मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ निलंबन सहित कार्रवाई भी की है।
क्या केवल पद बदलना कार्रवाई है?
जनता के बीच यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि यदि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में इतनी बड़ी जनहानि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल स्थान या पद बदलने तक सीमित क्यों रहे? सस्पेंशन, अटैचमेंट या पद परिवर्तन अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करते। अंतिम जिम्मेदारी तो निष्पक्ष जांच के बाद ही तय होनी चाहिए। लेकिन यदि जांच में गंभीर लापरवाही प्रमाणित होती है, तो उसके अनुरूप कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई होना जरूरी है।
सरकार को देना होगा जवाब
मामले की मजिस्ट्रियल जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि जहरीली शराब कहां से आई, उसका वितरण कैसे हुआ, संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां विफल हुई और किन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है।
जनता का सवाल सीधा है-जिम्मेदारी तय होगी या केवल कुर्सियां बदली जाएंगी?
20 वर्षों से सागर में पदस्थ अधिकारी को केवल एक पद से हटाकर उसी शहर में दूसरी जिम्मेदारी देना क्या पर्याप्त कार्रवाई है? इसका जवाब शासन और आबकारी विभाग को देना चाहिए। निष्पक्ष जांच हो, दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न होक-यही इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण मांग होनी चाहिए।
