4695 पदों की नई भर्ती पर घमासान, मध्यप्रदेश सरकार के गुड गवर्नेंस पर 9300 जनसेवा मित्रों के सवाल,“कुर्सी मिलते ही हमें हटा दिया” – भोपाल में प्रदर्शन कर जनसेवा मित्रों ने पुनः बहाली की उठाई मांग
4695 पदों की नई भर्ती पर घमासान, 9300 जनसेवा मित्रों की बहाली की मांग
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री युवा इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत 4695 पदों पर नए युवाओं को अवसर देने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बीच पूर्व में कार्यरत रहे करीब 9300 जनसेवा मित्रों की सेवा बहाली का मुद्दा फिर गरमा गया है। जनसेवा मित्र संगठन के बैनर तले 5 सितंबर को भोपाल में बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रदर्शन कर अपनी सेवा बहाल करने और अधिकारों को लेकर आंदोलन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तत्काल संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की। उनका कहना है कि पूर्व में जनसेवा मित्र के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके करीब 9300 युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
कुर्सी मिलते ही 9300 जनसेवा मित्रों को भूल गई सरकार?
जनसेवा मित्र संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में करीब 9300 युवाओं को जनसेवा मित्र के रूप में प्रशिक्षण एवं कार्य का अवसर दिया गया था। युवाओं को उम्मीद थी कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें आगे भी रोजगार अथवा सेवा का अवसर मिलेगा। संगठन का आरोप है कि सरकार बदलने के बाद इन युवाओं की सेवाएं आगे जारी नहीं रखी गईं। अब डॉ. मोहन यादव सरकार द्वारा 4695 नए पदों पर मुख्यमंत्री युवा इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाने से पुराने जनसेवा मित्रों में नाराजगी बढ़ गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि “चुनाव के वक्त जिन युवाओं की मेहनत और सेवाओं की जरूरत थी, सत्ता मिलने के बाद उन्हीं युवाओं को रोजगार से बाहर कर दिया गया। आज यही 9300 युवा अपने हक और भविष्य के लिए भोपाल की सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं।”
उमंग सिंघार ने भी उठाया मुद्दा
मामले को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जनसेवा मित्रों की सेवा बहाली की मांग का समर्थन किया। सिंघार ने लिखा कि 2023 के चुनाव से पहले 9300 जनसेवा मित्रों को नियुक्त कर सरकार के काम का प्रचार करवाया गया और चुनाव के बाद उन्हें पदों से हटा दिया गया। उनके अनुसार, तब से जनसेवा मित्र लगातार सेवा बहाली की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब अलग-अलग योजनाओं के नाम पर फिर इसी तरह की अस्थायी नौकरियां देने की बातें की जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आते ही युवाओं को नौकरी का सपना दिखाना और चुनाव के बाद उन्हें हटा देना ही भाजपा सरकार की नीति है?
युवाओं के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से युवाओं की मजबूरी का फायदा नहीं उठाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने वाले रोजगार की दिशा में ठोस नीति बनाने की मांग की। उन्होंने जनसेवा मित्रों की तत्काल सेवा बहाली के साथ उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाए जाने की मांग का समर्थन किया।
नई भर्ती बनाम पुराने जनसेवा मित्र
एक तरफ सरकार 4695 पदों पर नए युवाओं को मुख्यमंत्री युवा इंटर्नशिप कार्यक्रम के माध्यम से अवसर देने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके करीब 9300 जनसेवा मित्र सेवा बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बतादें, अब इस पूरे मामले में सरकार का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुराने जनसेवा मित्रों की बहाली को लेकर सरकार क्या निर्णय लेती है और नई इंटर्नशिप योजना के साथ उनके भविष्य को लेकर क्या रास्ता निकाला जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।