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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 58 वोट चाहिए, 10 वोट पूरे चुनाव मे भाजपा और कांग्रेस की दिशा तय करेंगे

मध्य प्रदेश में 18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए कुल 4 प्रमुख उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें भाजपा ने 3 और कांग्रेस ने 1 उम्मीदवार उतारा है।

 

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 58 वोट चाहिए। विधानसभा में प्रभावी मतदाता 228 हैं।

यदि भाजपा के पास 164 विधायक हैं और उसने 3 उम्मीदवार उतारे हैं, तो गणित इस प्रकार हैर-

पहले उम्मीदवार को- 58 वोट
दूसरे उम्मीदवार को- 58 वोट
कुल आवश्यक- 116 वोट

164 – 116 = 48 वोट बचते हैं।

यानी भाजपा अपने तीसरे उम्मीदवार (महेश केवट) को अधिकतम 48 वोट अपने दम पर दे सकती है। जबकि जीत के लिए 58 वोट चाहिए, इसलिए उसे कम से कम 10 अतिरिक्त वोट अन्य दलों या क्रॉस-वोटिंग से जुटाने होंगे।

संभावित वोट बंटवारा
उम्मीदवार भाजपा के वोट
उम्मीदवार 1 -58
उम्मीदवार 2 -58
महेश केवट – 48
कुल -164

इसी वजह से तीसरी सीट पर मुकाबला भाजपा के महेश केवट और कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के बीच रोचक हो गया है। भाजपा को लगभग 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है।

 

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 की तीसरी सीट का गणित काफी दिलचस्प है।

जीत के लिए कितने वोट चाहिए?

228 सदस्यीय विधानसभा में एक राज्यसभा उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोट चाहिए।

वर्तमान विधानसभा में संख्या बल
भाजपार- 164 विधायक
कांग्रेसर- 65 विधायक (एक-दो सीटों पर इस्तीफे/अनुपस्थिति की स्थिति अलग हो सकती है)
अन्यरू कुछ निर्दलीय और छोटे दल
भाजपा की रणनीति

भाजपा ने 3 उम्मीदवार उतारे हैं।

उम्मीदवार आवश्यक वोट
भाजपा उम्मीदवार-1 -58
भाजपा उम्मीदवार-2 -58
भाजपा उम्मीदवार-3- (महेश केवट) 58

भाजपा के 164 वोट में से

58 + 58 = 116 वोट पहले दो उम्मीदवारों को
शेष = 48 वोट

अर्थात तीसरे उम्मीदवार महेश केवट के पास भाजपा के अपने 48 वोट हैं।

जीत के लिए जरूरत

58 – 48 = 10 अतिरिक्त वोट
कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस की उम्मीदवार हैं मीनाक्षी नटराजन।

यदि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट रहते हैं, तो उसके पास जीत के लिए आवश्यक 58 से अधिक वोट जुटाने की संभावना रहती है। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार का पलड़ा मजबूत माना जाएगा।

भाजपा को जीत कैसे मिल सकती है?

तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को इनमें से किसी एक या कई रास्तों से अतिरिक्त वोट चाहिएरू

निर्दलीय विधायकों का समर्थन।
छोटे दलों का समर्थन।
कांग्रेस में क्रॉस-वोटिंग।
किसी विधायक का मतदान से अनुपस्थित रहना या वोट निरस्त होना।

यदि भाजपा 10 या उससे अधिक अतिरिक्त वोट जुटा लेती है, तो महेश केवट की जीत संभव हो सकती है।

मुकाबला क्यों रोचक है?
भाजपा के पास तीसरी सीट के लिए अपने दम पर पर्याप्त वोट नहीं हैं।
कांग्रेस के पास सीट बचाने लायक संख्या है, बशर्ते उसके विधायक एकजुट रहें।
इसलिए चुनाव का परिणाम क्रॉस-वोटिंग, निर्दलीय समर्थन और मतदान के दिन की रणनीति पर काफी हद तक निर्भर करेगा।

सरल शब्दों में

भाजपा के तीसरे उम्मीदवार के पास शुरुआती गणित में 48 वोट।
जीत के लिए चाहिए 58 वोट।
कमी 10 वोट।
यही 10 वोट पूरे चुनाव की दिशा तय करेंगे।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
तरुण चुघ
रजनीश अग्रवाल
महेश केवट

कांग्रेस
मीनाक्षी नटराजन
चुनाव का सीधा मुकाबला

भाजपा के संख्या बल के आधार पर तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल की जीत लगभग तय मानी जा रही है। तीसरी सीट पर भाजपा के महेश केवट और कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के बीच मुकाबला है।

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