ब्रेकिंग
सागर जहरीली शराब कांड पर जीतू पटवारी का सरकार पर हमला, बोले-शराब माफियाओं का कब्जा 4695 पदों की नई भर्ती पर घमासान, मध्यप्रदेश सरकार के गुड गवर्नेंस पर 9300 जनसेवा मित्रों के सवाल,“कु... सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नवीन पदस्थापना के आदेश जारी मंदसौर पुलिस ने अंतरराज्यीय बागरिया गैंग का किया पर्दाफाश, 5 राज्यों में 17 स्थानों पर नकबजनी की वार... उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा रविवार को भाजपा की जिला बैठक एवं कार्यशाला में होगें शामिल गरोठ के वार्ड एक मे सड़क के गड्ढों से परेशान जनता, धरने की चेतावनी शिक्षक दिवस पर ‘हमारे शिक्षक ऐप’ का सिस्टम गड़बड़ाया.!, स्कूल में मौजूद शिक्षकों को मिला ‘अनुपस्थित’ क... किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर के जन्मदिन पर शुभकामनाओं का सिलस... आयुष्मान भारत के सीईओ अरविंद शाह ने मध्यप्रदेश में मरीजों के ईलाज में गड़बड़ करने वाले 2 हॉस्पिटल के व... पिपलियामंडी पुलिस द्वारा अवैध शराब परिवहन करते आरोपी गिरफ्तार

मतदाता न तो किसी की आलोचना करने को तैयार हैं और न ही किसी के पक्ष में बोलने को। उभी उम्मीदवार हैरान परेशान है।

Political parties surprised by the silence of voters in Madhya Pradesh - Bhopal News in Hindi

भोपाल। मध्य प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव चिन्ह आबंटीत हो चुके है, मगर मतदाताओं की चुप्पी अब भी बरकरार है और यही चुप्पी उम्मीदवार से लेकर राजनीतिक दलों को हैरान कर रही है।
राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में 17 नवंबर को मतदान होने वाला है और दोनों प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस व भाजपा सभी सीटों के लिए अपने उम्मीदवार मैदान में उतार चुकी है।
दोनों ही दलों ने बड़ी संख्या में बागियों को मनाने में कामयाबी हासिल कर ली है, मगर अब भी 15 से ज्यादा ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां बागी मैदान में है।
दोनों प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी जहां अब भी बागियों को मनाने में लगी है, वहीं दूसरी ओर मतदाताओं की नब्ज टटोलने का दौर भी जारी है।
जमीनी फीडबैक जो राजनीतिक दलों के पास आ रहा है वह उन्हें हैरान करने वाला है। मतदाता न तो किसी की आलोचना करने को तैयार हैं और न ही किसी के पक्ष में बोलने को। दोनों ही दल इस भरोसे में हैं कि मतदाता उनके साथ होगा और सत्ता की कुर्सी पर वही काबिज होंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों को मानना है कि आमतौर पर नामांकन भरने और वापसी तक मतदाताओं का यही रुख रहता है, मगर इस बार मतदाताओं की चुप्पी कहीं ज्यादा है और वह दोनों ही राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र, वचन पत्र का अध्ययन करने और उम्मीदवार का आंकलन करने के बाद ही कोई मानस बनाएंगे, ऐसा अभी तक नजर आ रहा है। उसी के चलते मतदाताओं की चुप्पी और लंबी खींचने की संभावना बनी हुई है।

#Khas Khabar

Leave A Reply

Your email address will not be published.