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रोबोटिक यंत्र चंद्रमा की सतह पर घूम घूम कर तमाम प्रकार की जानकारी इकटठा करेगा

नई । दिल्ली विक्रम लैंडर के चांद की सतह पर पहुंचने की साथ हिंदुस्तान दक्षिणी ध्रुव पर पहला और चंद्रमा पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है।
इसरो विक्रम लैंडर की सफल अवतरण के बाद अब रोवर प्रज्ञान भी चंद्रमा की सतह पर उतर गया है। इसरो का यह छह पहियों वाला यह रोबोटिक यंत्र चंद्रमा की सतह पर घूम घूम कर तमाम प्रकार की जानकारी इकटठा करेगा। इसरो डाटा सेंटर को रियल टाइम ट्रांसमिट करेगा।
23 अगस्त की शाम ठीक 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर उतरा था। इसके ठीक 2 घंटे 26 मिनट बाद रोवर प्रज्ञान भी बाहर आ गया है। यह छह पहियों वाला रोबोट हर सेकेंड एक सेंटीमीटर चलेगा। इसके हर कदम के साथ ही अशोक चिंह की छाप चांद की धरती पर चस्पा होती जाएगी। इसके पहिए में अशोक चिंह की छाप लगाई गई है।

इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मिट्‌टी पर भारत के राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ और इसरो के लोगो की छाप भी छोड़ेगा। हालांकि, इसे लेकर अभी इसरो का कोई बयान नहीं आया है।

चहलकदमी के दौरान रोवर की रफ्तार 1 सेमी/सेकंड है। इस दौरान पानी और कीमती धातुओं के साथ आस-पास की चीजों को स्कैन करने के लिए नेविगेशन कैमरों का इस्तेमाल करेगा और इसरो की कमांड टीम को जानकारी भेजेगा।

अब ये काम करेगा लैंडर विक्रम
लैंडर विक्रम भी काम करता रहेगा। अब लैंडर 14 दिन तक काम करेगा। चंद्रमा की सतह का प्लाज्मा का पता लगाएगा। चंद्रमा के घनत्व का भी पता लगाएगा। चंद्रमा के तापीय गुणों की माप करेगा। यह प्रज्ञान और इसरो के बीच कनेक्टर का काम करेगा।

इसरो के पास ऐसी आएगी जानकारी

रोवर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह की जानकारी लैंडर विक्रम को देगा। लैंडर विक्रम इसे डीप स्पेस नेटवर्क के माध्यम से इसरो भेजेगा। इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क के माध्यम से यह ब्यालालू इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क तक आएगी।

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