मध्यप्रदेश में 21 साल बाद मध्यप्रदेश में नई लोक परिवहन व्यवस्था की शुरुआत, मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा का शुभारंभ, इस योजना की सफलता के बाद प्रदेश में 25,000 बसों का विस्तार होगा
भोपाल। मध्यप्रदेश में 21 साल बाद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नए स्वरूप में शुरू की गई। शुक्रवार को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ तथा ‘पीएम ई-बस सेवा’ का शुभारंभ किया। पहले चरण में सात शहरों के लिए 351 बसों को हरी झंडी दिखाई गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती और सेवा संकल्प अभियान के बीच प्रदेशवासियों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सौगात मिली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में लिए गए निर्णय के बाद प्रदेश के 55 जिलों में अध्ययन और 3,000 से अधिक रूटों का सर्वे कराया गया, जिसके आधार पर मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सेवा के माध्यम से आम लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती परिवहन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। गांव, गरीब, मजदूर और किसान सहित सभी वर्गों के लिए बेहतर आवागमन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश सरकार को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ पर बधाई देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से सुरक्षित, किफायती और जवाबदेह सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित होगी। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से परिवहन व्यवस्था के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की बात कही गई।
योजना के तहत बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता की रियल टाइम निगरानी की जाएगी। बसों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं।
पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को शामिल किया गया है। इन शहरों में कुल 351 बसें संचालित होंगी। योजना के पहले वर्ष में करीब 1,500 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है, जबकि वर्ष 2031 तक प्रदेश में लगभग 15 हजार आधुनिक सार्वजनिक बसों का नेटवर्क विकसित करने की योजना है। साथ ही 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के अनुसार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार में इलेक्ट्रिक और अन्य पर्यावरण-अनुकूल बसों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे प्रदेश के शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।