शुभ दीपावली महालक्ष्मी महापूजा मुर्हुत शुभ संवत 2083 कार्तिक मास कृष्ण पक्ष सन् 2026 के विशेष शुभ मुर्हूत एवं विशेष भविष्यवाणी
(पं. शिव प्रकाश जोशी)
भारतीय ज्योतिष परिषद के जिला अध्यक्ष तथा ज्योतिष शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पं. शिव प्रकाश जोशी द्वारा बताया गया कि सर्व प्रथम दिनांक 06/11/2026 को महापूजा धन के देवता श्री कुबेर जी महाराज एवं आयुर्वेद के जनक श्री धनवन्तरी महाराज की महापूजा शुक्रवार तेरस प्रदोष में प्रातःकाल 6 बजे से प्रातः 10ः30 बजे तक सभी संस्थान, मकान दुकान, फेक्ट्रीयों में गंगाजल गौमुत्र से शुद्धीकरण तथा विशेष साज सज्जा तथा कुबेर भगवान की प्रतिमा मुर्ती पूजा तथा री धनवंतरी जी महाराज की प्रतिमा या चित्र तस्वीरों की स्थापना दिप प्रज्वलन, हार फुल, प्रसाद, का नैवेद्य लगाया तथा दोपहर में 12ः00 बजे से 01ः30 बजे तक शुभ वेला में चांदी सोना समस्त धातु मशिनरी, धान, वस्त्र आदि का क्रय विक्रय करना शुभ माना गया। सायंकाल गोधूलि वेला में सभी स्थानों पर दीप प्रज्वलित करना पूजा अर्चना आदि का विशेष महत्व है।
द्वितीय दिवस 07/11/2026 को रूप चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। प्रातः सूर्याेदय से पहले स्नान करना चाहिए। सुर्य अर्घ्य देना चाहिये क्योंकि यह दिन सूर्य के पुत्र यमराज का दिन भी माना गया है अतः माता बहनो को सरोवर तालाब नदी आदि स्थान पर सायंकाल 6ः30 से 7ः30 बजे यमराज के नाम दीपदान तथा टाटीयो पर दीपक जलाकर विसर्जन करने का विशेष महत्व हैं इसे दिन माता बहनों और भाइयों को व्रत भी रखना चाहीए। दिप दान करने से यमराज की यातनाओं से मुक्ति मिलती है तथा नरक का वास नहीं होता है स्वर्ग की प्राप्ति होती है। धुप दिप नैवेद्य हार फुल प्रसाद अर्पण करना चाहीए।
तृतीय दिवस दिनांक 08/11/2026 महालक्ष्मी महापूजा का यह दिन विशेष पूजा विधान का दिन है। प्रातः काल सूर्याेदय से पुर्व सभी मकान संस्थान, दुकान, पर गोमूत्र गंगाजल से स्थान पवित्र करे। प्रातः काल 7ः30 से 12ः40 तक पूजन विधान भी करना श्रेृष्ठ माना गया है इसमें चल लाभ अमृत तीनो चोघडिया साथ है। तथा अभिजीत नक्षत्र भी रहेगा। इसके पश्चात दुकान संस्थान मिल फैक्ट्री तथा निवास स्थान पर दोप. 01ः30 से 03ः00 बजे तक शुभ का चौघड़िया पूजन करने के लिये विशेष शुभ माना गया है। उसके पश्चात वृषभ लग्न सायंकाल 06ः40 से 08ः15 तक विशेष शुभ माना गया इसमें महालक्ष्मी की महापूजा करना विशेष शुभ माना गया तथा चौघड़िया के मान से भी सायंकाल 06ः00 से 10ः30 का समय अतिउत्तम रहेंगा। इसके पशचात सिंह लग्न की महापूजा का समय रात्रि 12ः46 से रात्रि 02ः40 तक रहेगा। इसमेें कनक धारा स्त्रोत महालक्ष्मी स्त्रोत विष्णु सहस्त्र नाम तथा कुबैर पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इससे धन लक्ष्मी वैभव व्यापार व्यवसाय श्रृेष्ठ तथा घर में सुख शांति व आनंद की प्राप्ति होती है। 146 वर्षे पश्चात ईशा महायोंग दिनांक 08/11/2026 को आया है। जो सम्पूर्ण समाज तथा सम्पूर्ण भारत एवं विश्व कल्याण शांति के लिये श्रृेष्ठ माना गया है। रबी की फसल श्रृष्ठ होगी। दिसंबर जनवरी और फरवरी में मावठे होगे जिससे फसल अच्छी श्रृेष्ठ होगी। सभी फसलों के भाव ऊंचे रहेंगंे। सभी प्रकार की धातुएं चांदी, ताबा, पितल तेजी के बाद विशेष गिरावट आयेगी। विश्व शांति एवं सद्भावना का त्यौहार है। शुभकामनाओं सहित मंगलकारी हो … इति शुभम
(ज्योतिषाचार्य/भागवताचार्य)