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गोशाला अनुदान व्यवस्था में बदलाव पर सियासत तेज, प्रति गोवंश 40 रुपये में से 10 रुपये पशु आहार निर्माताओं को सीधे देने की तैयारी, कांग्रेस ने जताई आपत्ति, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उठाए सवाल

भोपाल/ विदिशा। मध्यप्रदेश में गोशालाओं को मिलने वाले अनुदान की व्यवस्था में बदलाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। वर्तमान में प्रति गोवंश प्रतिदिन मिलने वाले 40 रुपये के अनुदान में से 10 रुपये पशु आहार निर्माताओं को सीधे भुगतान किए जाने की तैयारी है। इसके बाद गोशाला संचालकों को प्रतिदिन 30 रुपये की राशि प्राप्त होगी। नई व्यवस्था सितंबर माह से लागू किए जाने की चर्चा है।

जानकारी के अनुसार, एक अप्रैल 2025 से पहले गोशालाओं को प्रति गोवंश 20 रुपये प्रतिदिन का अनुदान मिलता था, जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया था। अब मध्यप्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत विभागीय संस्थाओं के माध्यम से गोशालाओं को पशु आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, आहार मद की 10 रुपये राशि सीधे पशु आहार निर्माताओं को भुगतान की जाएगी।

इस बदलाव का असर विदिशा जिले की 148 गोशालाओं पर पड़ सकता है, जहां करीब 21 हजार बेसहारा गोवंश रखे जा रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग की उप संचालक डॉ. दीप्ति कोटस्थाने ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में एक सर्कुलर जारी हुआ था, जिसमें सितंबर से पशु आहार सीधे उपलब्ध कराने का उल्लेख है। हालांकि अभी तक विभाग को कोई नया निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।

कमलनाथ ने उठाए सवाल

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में गोवंश के आहार पर मिलने वाली राशि में कमी चिंताजनक है। यदि सरकार पशु आहार निर्माताओं को सीधे भुगतान करना चाहती है, तो इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि गोशालाओं को मिलने वाले अनुदान में कोई कमी न आए।

कमलनाथ ने सरकार से इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने और यदि ऐसा कोई निर्णय लिया गया है तो उसे पुनर्विचार कर वापस लेने की मांग की है।

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