भोपाल। ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्लूसी) द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गान के स्थान पर केवल दो अंतरे गाने के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने एक्स पर कहा कि कांग्रेस का यह निर्णय राष्ट्र की भावनाओं का अपमान है और संसद द्वारा बनाए गए कानून की भी अवहेलना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के अवसर पर पूर्ण गान को कानूनी स्वरूप प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। देवड़ा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर वोट बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण के रास्ते पर लौटती दिखाई दे रही है।
कांग्रेस नेता बोले-कार्यक्रमों में दो अंतरे ही गाए जाएंगे
मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सीडब्लूसी के प्रस्ताव पर एक्स पर कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो अंतरे ही गाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में दो अंतरों को स्वीकार किया था और बाद में संविधान सभा में भी इसे स्वीकार किया गया, इसलिए इसमें बदलाव का सवाल नहीं है। दलवई ने कहा कि देश को धर्मनिरपेक्ष बनाए रखना कांग्रेस की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस निर्णय के लिए सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को बधाई भी दी।
भूपेश बघेल ने कांग्रेस के स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को बताया
रायपुर में कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गीत कांग्रेस के लोग गाते थे और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाठियां, गोलियां और जेल जाने का सामना भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया। बघेल ने भाजपा से एक्स पर सवाल करते हुए कहा कि वह उदाहरण बताए कि ‘वंदे मातरम्’ गाते हुए भाजपा के किन लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाठियां या गोलियां खाईं। उन्होंने त्ैै को भी ‘वंदे मातरम्’ को अपनाने की सलाह दी। बघेल ने कहा कि 1897 में कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने भी इस गीत के दो छंद गाए थे।
‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर कांग्रेस और भाजपा के बीच इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।