गीता जयंती के अवसर पर मंदसौर जिला जेल में आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन हुआ, भागवताचार्य पं.श्रीकृष्ण वल्लभ शास्त्री (मालवा स्वामी) गीता के 15वें अध्याय का पाठ व सरल प्रवचन से बंदीगणों को गीता ज्ञान का कराया रस पान
मंदसौर। मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार गीता जयंती के अवसर पर एक दिसंबर को जिला जेल मंदसौर में गीता जयंती के पावन अवसर पर भागवताचार्य पं.श्रीकृष्ण वल्लभ शास्त्री (मालवा स्वामी) द्वारा श्रीमद् भागवत गीता के 15वें अध्याय का वाचन तथा उसके सरल, जीवनोपयोगी अर्थों का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में बंदियों को नैतिक मूल्यों, कर्तव्य पालन, आत्मसंयम और आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करने हेतु शांत वातावरण में श्लोक पाठ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों में भागवताचार्य पं.श्रीकृष्ण वल्लभ शास्त्री (मालवा स्वामी) और जैन मुनि संतश्री ने पुरुषोत्तम योग के तात्विक भावों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया।
पं.श्रीकृष्णवल्लभ शास्त्री ने कहा कि गीता का 15वां अध्याय मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप, कर्म और परमात्मा से जुड़ने का मार्ग सिखाता है। जैन मुनि संतश्री ने संसार को ऊर्ध्वमूल-अधःशाखा वाले विशाल वृक्ष के रूप में समझाते हुए बताया कि मोह, वासना और अहंकार जैसी शाखाओं को ज्ञान और साधना से छिन्न करना ही मुक्ति का मार्ग है। उनके विचारों ने उपस्थित बंदियों और अधिकारियों को जीवन की दिशा पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री पी.के. सिंह ने संत जनों का स्वागत कर कहा कि यदि बंदीगण संतों द्वारा बताए गए मार्ग तथा श्रीमद् भगवद्गीता के आदर्शों पर चलें, तो उनका जीवन अनुशासित, शांत और सार्थक बन सकता है। उन्होंने गीता को जीवन की कठिन परिस्थितियों में दिशा दिखाने वाला अमूल्य ग्रंथ बताया।
कार्यक्रम के बाद भागवताचार्य पं.श्रीकृष्ण वल्लभ शास्त्री (मालवा स्वामी) एवं जैन मुनि संतश्री ने जिला जेल का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों की दिनचर्या और भोजन व्यवस्था का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने भोजनशाला में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली। संतश्री ने स्वेच्छा से गोचरी रूप में दो रोटियाँ ग्रहण कीं, जबकि सब्जी में लहसुन-प्याज होने के कारण उसे त्याग दिया। जेल प्रशासन ने बताया कि संतश्री सामान्यतः कहीं भोजन ग्रहण नहीं करते, पर गीता जयंती के पावन अवसर पर प्रसादस्वरूप रोटी स्वीकार कर सभी को सेवा, साधना और सरलता का संदेश दिया।
जिला जेल में आयोजित यह आध्यात्मिक आयोजन बंदियों के मनोबल को सुदृढ़ करने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक सराहनीय पहल सिद्ध हुआ।