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उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए चपरासी को रंगेहाथों पकड़ा, मन्दसौर जिले के गरोठ एसडीएम कार्यालय में कार्यरत चपरासी पंकज योगी ने प्लॉट के डायवर्सन के लिए 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी,

मंदसौर। मध्यप्रदेश जिला मन्दसौर जिले के तहसील गरोठ में स्थित एसडीएम कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी पंकज योगी को उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा गया। पंकज योगी, जो आधिकारिक तौर पर चपरासी (प्यून) के पद पर नियुक्त था, कथित रूप से बाबू का काम करता था और लंबे समय से अधिकारियों के लिए रिश्वत के लेनदेन में शामिल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना की शुरुआत 18 जून 2025 को हुई, जब ग्राम साठखेड़ा, तहसील गरोठ, जिला मंदसौर निवासी दीपक राठौर ने उज्जैन लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा को लिखित शिकायत दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंकज योगी, जो एसडीएम कार्यालय में बाबू के रूप में काम करता है, ने प्लॉट के डायवर्सन के लिए 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के लिए लोकायुक्त पुलिस ने इंस्पेक्टर हिना डाबर के नेतृत्व में जांच शुरु की, जिसमें शिकायत सही पाई गई। सत्यापन के दौरान पंकज योगी ने दीपक राठौर से 5,000 रुपये पहले ही ले लिए थे।
शिकायती मामले को लेकर आज 19 जून 2025 को उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में पंकज योगी को गरोठ के एसडीएम कार्यालय में 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। भृष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।  लोकायुक्त की ट्रैप टीम में डीएसपी राजेश पाठक, इंस्पेक्टर हिना डाबर, श्याम शर्मा, इसरार, अनिल अटोलिया, रमेश डाबर, उमेश जाटव और अन्य सदस्य शामिल थे।

लोकायुक्त पुलिस ने पंकज योगी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पंकज योगी चपरासी के पद पर होने के बावजूद बाबू की भूमिका निभा रहा था।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है, और यह पता लगाया जाएगा कि क्या अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी इस रिश्वतखोरी में शामिल तो नही हैं।

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