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शिवराज सिंह चौहान बोलेकृ“मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का करे...
मंदसौर जिले में साइबर ठगी के दो मामले दर्ज, क्रेडिट कार्ड और बैंक खाते से धोखाधड़ी, भानपुरा और भावगढ़ ...
भोपाल। मध्य प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों के मान्यता नियमों में बदलाव को लेकर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा कक्षा पहली से आठवीं मान्यता नवीनीकरण में जो तानाशाही दिखाई गई है। वह मध्य प्रदेश के स्कूल संचालकों, शिक्षकों एवं कार्यरत कर्मचारियों के दमन का रास्ता है। मध्य प्रदेश में लगभग 18,000 से अधिक स्कूल बंद होने की कगार पर हैं।ये स्कूल विगत वर्षों से इसी विभाग से मान्यता प्राप्त कर संचालित हैं। एक तरफ निशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 कहता है कि शिक्षा नि:शुल्क होनी चाहिए। वहीं 30 से 40 हजार रुपए सावधि जमा और रजिस्टर्ड किरायानामा यह दर्शाता है कि शिक्षा विभाग के लिए शिक्षा व्यवसाय बन गया है।
संचालक मंच अपने साथियों के साथ 4 फरवरी को प्रदेश भाजपा कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। कोषाध्यक्ष मोनू तोमर ने कहा कि कुछ संचालक मुंडन करवाएंगे, तो कुछ सरकार से इच्छा मृत्यु मांगेंगे। सरकार जब स्कूल बंद करने पर तुली है तो संचालक भी हार मानने को तैयार नहीं है।