भोपाल। मध्यप्र प्रदेश के पंचायत सचिव 5 माह महिनों से वेतन नही मिलने से खून के आंसू रो रहे है तो दूसरी और सरपंच अधिकार विहिन होकर जनता को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे। सहायक सचिव 9000 मानदेय में बंध ुआ मजदूर बनकर कभी त्याग-पत्र तो कभी आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे। मुख्यमंत्री से लेकमर पंचायत मंत्री आ ैर विभाग का अमला सरपंच सचिव और सहायक सचिवों का भविष्य बर्बाद करने का तमाशा मुक बधिर बनकर देख रहे है लेकिन अब अन्याय की इंतहा हो गई है। हक की आवाज उठाने के लिए, अनुमति नहीं देकर हिटलर फरमान जारी है। जिससे प्रदेश के 75000 सरपंच, सचिव, सहायक सचिवां में आक्रा ेश की ज्वाला भभकने वाली है। बीबी-बच्चे भूखे प्यासे मरे, इससे ज्यादा अच्छा होगा हम भोपाल की कुम्भकरर्णीय सरकार के सामने सब-कुछ न्यौछावर कर दे। उक्त आशय की जानकारी मध्यप्रदेश के पंचायत सचिव संगठन के प्रदेशाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने बताया कि हक की आवाज उठाने के लिए एक माह पूर्व ही अनुमति का आवेदन दिया था। लेकिन आज दिनांक तक अनुमति प्रदान नहीं की गई है। गांधीजी के पंचायत राज के सूत्रधार सरपंच, सचिव और सहायक सचिवों से अभिव्यक्ति का अधिकार भी सरकार ने छिन लिया है। सरकार मांगों से ध्यान हटाने के लिए, 3 से 5 महिने का वेतन पंचायत सचिवों को नहीं दिया गया है। प्रदेश में लगभग 1000 बच्चों को फीस नहीं जमा होने से स्कूलों से निकाल दिया गया है वहीं 775 फाईनेन्स की हुई बाईक किस्तें अदा नहीं होने से बैंक द्वारा खींच ली गई है वहीं होम लोन की किस्तें अदा नहीं होने पर सेकड़ों पंचायत सचिवों को बैंकों ने कुर्की के सूचना पत्र जारी कर दिये है। जिससे पंचायत सचिव तस्त्र है। सरकार ने सरपंचों की 11 सूत्रीय मांगें एवं पंचायत सचिवों का विभाग में संविलियन, 6वें वेतनमान की गणना नियुक्ति दिनांक से करने एव 7वॉ वेतनमान वर्ष 2018 से एरियर सहित देने, अनुकम्पा नियुक्ति का सरलीकरण कर, प्रदेश में लम्बित अनुकम्पा के 400 आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करना एवं सहायक सचिवो का जिला संवर्ग में संविलियन कर एक निश्चित वेतनमान पर नियमितिकरण आदि मांगों पर वादा खिलाफी कर रही है। 5 अगस्त 2021 को 5 दिन बाद 10 अगस्त मंत्री जी के लॉन में एक मुश्त निराकरण करने का आश्वासन पंचायत मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री की और से दिया गया था, लेकिन आज 18 माह बीत जाने पर भी एक भी मांग का निराकरण नहीं किया आौर भी दिन सचिव संगठन और आ ंदोलन में शामिल संगठनों से चर्चा नहीं की। सरकार की इस वादा खिलाफी से पंचायत सचिव त्रस्त है। राष्ट्रीय सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष निभर्य सिंह यादव, सरपंच संघ के अध्यक्ष सोमेश गुप्ता, सहायक सचिव महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रितेश तिवारी, द्वारा संयुक्त रूप से निर्णय लिया गया है कि अब 6 मार्च को आर-पार की लड़ाई होगी। अनुमति नहीं मिलने की दशा में रोशनपुरा चौराहे पर एकत्र होंगे और विधानसभा घेराव के लिए अपने बीबी-बच्चों सहित प्रदेश की सरकार को ज्ञापन सौंपा जायेगे। अगर सरकार मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के साथ अप्रैल में होने वाले विशेष प्रकार का महा-आंदोलन (सब बंद आंदोलन) में भाग लेकर पंचायतों पर ताला बंदी कर, अनिश्चितकालीन आंदोलन पर चले जायेंगे।
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