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म.प्र.मे ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण प्रस्ताव कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे,15 जून 2026 तक सुची होगी जारी

ग्राम पंचायत सचिवों के तबादलों पर बड़ा फैसला, 10 साल से एक जगह जमे सचिवों का होगा स्थानांतरण

भोपाल। डॉ.मोहन यादव की मध्यप्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण और अंतर-जिला संविलियन को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ सचिवों का स्थानांतरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

जारी आदेश के मुताबिक 1 जून से 15 जून 2026 तक जिले के भीतर ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे, जबकि आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन ग्राम पंचायतों में सचिव का कोई नातेदार सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित हुआ है, वहां से सचिव का स्थानांतरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। साथ ही किसी सचिव को उसके पैतृक गांव या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं किया जाएगा।

प्रतिबंध अवधि में केवल विशेष परिस्थितियों जैसे न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत, भ्रष्टाचार, लोकायुक्त या पुलिस जांच तथा मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त उच्च प्राथमिकता वाले मामलों में ही स्थानांतरण संभव होगा।

वहीं अंतर-जिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर किया जाएगा। विवाहित, विधवा एवं तलाकशुदा महिला सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी। अनुकंपा नियुक्त सचिवों को भी गृह जिले में संविलियन की सुविधा मिलेगी। हालांकि यह सुविधा पूरे सेवाकाल में केवल एक बार ही उपलब्ध होगी।

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि संविलियन के बाद संबंधित सचिव का नाम नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा। विभाग ने सभी कलेक्टरों और जिला पंचायतों को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार के इस फैसले से वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ सचिवों के तबादलों का रास्ता साफ हो गया है और पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता व निष्पक्षता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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