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कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर सोनोग्राफी मशीन को सीलबंद कर दिया गया।

भोपाल। मध्यप्रदेश, इंदौर मे स्वास्थ्य सुरक्षा और पीसीपीएनडीटी एक्ट के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर शुक्रवार को विजयनगर स्थित सीएचएल चैरिटेबल ट्रस्ट (निरंजनपुर चौराहा) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन को सीलबंद कर दिया गया। चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस अस्पताल में एक-दो नहीं, बल्कि 10 अपंजीकृत चिकित्सक अवैध रूप से सोनोग्राफी संबंधी कार्य कर रहे थे।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि उक्त अस्पताल का पीसीपीएनडीटी पंजीयन वैध होने के बावजूद आंतरिक व्यवस्था में भारी अनियमितता मिली। विशेष जांच दल के निरीक्षण में पाया गया कि रेडियोलॉजी विभाग में ऐसे चिकित्सक तैनात थे, जिनका विभाग के रिकॉर्ड में कोई पंजीकरण ही नहीं था। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत यह न केवल तकनीकी लापरवाही है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।

जांच टीम की रिपोर्ट और संबंधित चिकित्सकों द्वारा दिए गए असंतोषजनक स्पष्टीकरण के बाद कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए। शुक्रवार को जूनी इंदौर तहसीलदार श्रीमती प्रीति भिसे एवं पीसीपीएनडीटी दल ने मौके पर पहुँचकर पंजीकृत अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन को तत्काल प्रभाव से सीलबंद किया। टीम ने मौके पर ही पंचनामा तैयार कर वैधानिक प्रक्रिया पूरी की।

प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई से शहर के निजी चिकित्सालयों में हड़कंप मच गया है। सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि केवल वही विशेषज्ञ सोनोग्राफी कर सकते हैं जो विभाग में पंजीकृत हों। अपंजीकृत हाथों में ऐसी मशीनें देना कानूनन अपराध है। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य संदिग्ध स्वास्थ्य केंद्रों पर भी इसी तरह की आकस्मिक जाँच और सख्त कार्रवाई की जाएगी। NEWS@EMS

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