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भोपाल शहर की सड़कों पर रोज लगती है मजदूरों की मंडी, न सिर छुपाने की जगह, न पानी का इंतजाम

भोपाल। शहरी क्षेत्र में’ रोजाना सुबह सात से दस बजे तक 40 हजार से भी ज्यादा मजदूर दिहाड़ी की उम्मीद में सड़कों पर जमा होते हैं। पूरे शहर में ऐसे 12 से ज्यादा स्थान हैं, जहां रोज सुबह ये मजदूर खाने का डिब्बा हाथ में लिये काम की तलाश में खड़े होते हैं। ये मजदूर सड़कों पर काम की तलाश में तो भटक ही रहे हैं, पर जहां खड़े होते हैं, वहां इन्हें सिर छुपाने की जगह और पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है। सरकार इन लोगों के लिये शेड भी नहीं बनवा रही है। यही कारण है कि भोपाल के आसपास एवं दूरस्थ जिलों से आने वाले ज्यादातर श्रमिक बारिश शुरू होने से पहले ही अपने घर चले जाते हैं। मजदूरों को दो तरफा परेशानी होती है। एक तरफ तो काम नहीं मिलता, दूसरी तरफ जहां काम की तलाश में खड़े होते हैं, वहां भी उनके लिये कोई इंतजाम नहीं होता है। मामले में मप्र मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लेकर ’कलेक्टर, भोपाल एवं कमिश्नर, नगर निगम, भोपाल से प्रकरण की जांच कराकर ऐसे दैनिक कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए आवश्यक शेल्टर पेयजल व्यवस्था के साथ ही इन्हें शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकने के लिये आवश्यक जागरूकता की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुये एक माह में जवाब मांगा है।

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