मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने कहा- भूमि अधिकार मिलने के बाद बैंक लोन और रजिस्ट्री हो रही, फिर हमें क्यों उलझाया जा रहा?, स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री के निष्पादन अधिकारी बनने से पटवारियों का इनकार, डाटा शुद्धिकरण के बिना काम करने से मना; कोर्ट जाने की तैयारी
भोपाल/सागर। मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने कहा स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली रजिस्ट्रियों के निष्पादन अधिकारी की जिम्मेदारी दिए जाने का मध्यप्रदेश के पटवारियों ने विरोध किया है। पटवारियों का कहना है कि जब तक स्वामित्व योजना से जुड़े खसरा-खतौनी एवं अन्य डाटा का पूरी तरह शुद्धिकरण नहीं किया जाता, तब तक वे रजिस्ट्री निष्पादन अधिकारी के रूप में कार्य नहीं करेंगे। मांगों और आपत्तियों को लेकर पटवारियों ने रविवार को सागर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शासन के समक्ष अपना पक्ष रखा।
पटवारियों ने उठाए सवाल
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के उप-प्रांतीय अध्यक्ष मोहनलाल खरे, संभागीय अध्यक्ष सूरज शर्मा, जिलाध्यक्ष राजभान घोषी, तहसील अध्यक्ष मनीष दुबे एवं शैलेंद्र सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में पटवारी पत्रकार वार्ता में मौजूद रहे। पटवारियों ने कहा कि स्वामित्व योजना मूल रूप से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित है, जबकि रजिस्ट्री निष्पादन का कार्य पटवारियों पर डाला जा रहा है। उन्होंने राजस्थान और हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस तरह का कार्य पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायकों से कराया जा रहा है।
डाटा में त्रुटियों को लेकर चिंता
पटवारियों के अनुसार योजना के प्रारंभिक चरण में समग्र आईडी से डाटा फेच किए जाने के कारण कई अभिलेखीय एवं नाम संबंधी त्रुटियां सामने आई हैं। उनका कहना है कि ऐसी त्रुटियों के रहते रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों को जिम्मेदार बनाया जाना भविष्य में कानूनी विवाद खड़े कर सकता है। पटवारियों ने सागर जिले के एक पूर्व मामले का हवाला देते हुए कहा कि डाटा संबंधी खामियों के चलते एक पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और वह अब तक न्यायालयीन प्रक्रिया का सामना कर रहा है।
‘भूमि का अधिकार पहले ही मिल चुका, फिर नई रजिस्ट्री क्यों?’
पटवारियों का कहना है कि स्वामित्व योजना के तहत हितग्राहियों को पहले ही भूमि का अधिकार मिल चुका है। इसी आधार पर कई हितग्राहियों को बैंक ऋण भी प्राप्त हो रहा है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब भूमि अधिकार और बैंक लोन की प्रक्रिया पहले से चल रही है तो दोबारा रजिस्ट्री के माध्यम से क्या नया लाभ मिलेगा?
साइबर तहसील के नियमों का भी दिया हवाला
पटवारियों ने साइबर तहसील 1.0 एवं 2.0 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि नामांतरण प्रकरणों में निष्पादन अधिकारी वही हो सकता है जो राजस्व अभिलेख में दर्ज भूमि का धारक हो। उनका दावा है कि वर्तमान स्वामित्व रिकॉर्ड में क्रेता का नाम पहले से दर्ज है, ऐसे में रजिस्ट्री प्रक्रिया की उपयोगिता को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
भविष्य में सिविल कोर्ट में विवाद की आशंका
पटवारियों ने आशंका जताई कि यदि डाटा शुद्धिकरण के बिना रजिस्ट्री कराई जाती है और बाद में अभिलेखों में पुरानी त्रुटियां सामने आती हैं, तो विवाद राजस्व न्यायालय के बजाय सिविल कोर्ट तक पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति में पटवारियों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाए जाने और किसानों को भी लंबे समय तक न्यायालयीन प्रक्रिया में उलझने की आशंका है।
नए पटवारियों पर दबाव का आरोप
पटवारियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रोबेशन पीरियड में कार्यरत नए पटवारियों पर नौकरी समाप्त करने का दबाव बनाकर रजिस्ट्री कराने के लिए बाध्य किया जा रहा है। संघ ने इसे अनुचित बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।
1.95 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य, प्रति पटवारी 400 से 500 का बोझ
पटवारियों के अनुसार सागर जिले में करीब 1.95 लाख रजिस्ट्रियां प्रस्तावित हैं। इससे प्रत्येक पटवारी पर औसतन 400 से 500 रजिस्ट्रियों का अतिरिक्त बोझ आने की बात कही गई है। उनका दावा है कि उन्हें प्रतिदिन करीब 40 रजिस्ट्रियों का लक्ष्य दिया जा रहा है। पटवारियों ने स्पष्ट किया कि डाटा शुद्धिकरण और जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दों का समाधान होने तक वे इस कार्य का विरोध जारी रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।