भोपाल। बारिश के लिए किए गए एक पारंपरिक टोटके के बाद भोपाल में हुई वर्षा को लेकर सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। शनिवार 18 जुलाई को कुछ लोगों ने अच्छी बारिश की कामना को लेकर गधों को गुलाब जामुन खिलाए थे। इसके अगले दिन रविवार 19 जुलाई को भोपाल के कुछ इलाकों में बारिश हुई।
स्थानीय मान्यता के अनुसार यदि रूठे हुए मानसून को मनाने के लिए गधों को मिठाई खिलाई जाए और प्रार्थना की जाए तो बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इस तरह की मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन ग्रामीण और पारंपरिक क्षेत्रों में लंबे समय से ऐसे रीति-रिवाज प्रचलित रहे हैं।
शनिवार को भोपाल शहर की सड़कों पर दो गधों को ढोल-ढमाकों के साथ घुमाया गया। इस दौरान कुछ लोग हाथों में पोस्टर लेकर चल रहे थे, जिन पर ष्भटके हुए मानसून को वापस लाने और अच्छी बारिश के लिए ईश्वर से प्रार्थनाष् जैसे संदेश लिखे थे।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और अन्य राज्यों के कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने पर इस तरह के पारंपरिक उपाय किए जाते हैं।
मौसम विभाग ने 16 जुलाई से प्रदेश में बारिश के दूसरे दौर की शुरुआत का अनुमान जताया था, लेकिन शुरुआती दिनों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से लोगों में चिंता बढ़ी थी। इसी बीच शनिवार को यह लोक परंपरा निभाई गई और रविवार को बारिश होने से लोगों में इस संयोग की चर्चा तेज हो गई।
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश प्राकृतिक मौसमी परिस्थितियों, मानसूनी सिस्टम और वायुमंडलीय बदलावों पर निर्भर करती है। लोक मान्यताएं लोगों की आस्था और परंपरा से जुड़ी होती हैं।
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