बिजली संकट पर उबल पड़ा जनाक्रोश, मंदसौर में भीषण गर्मी में सैकड़ों किसानों ने किया बिजली विभाग का घेराव
अघोषित कटौती, फर्जी बिल और किसानों के उत्पीड़न के खिलाफ मंदसौर में जोरदार प्रदर्शन, सात दिन का अल्टीमेटम
भोपाल। मध्यप्रदेश, मंदसौर/पिपलिया स्टेशन। भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती, कथित फर्जी बिजली बिलों, किसानों के उत्पीड़न और बदहाल विद्युत व्यवस्था को लेकर सोमवार को मंदसौर में व्यापक जनाक्रोश देखने को मिला। मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के किसान नेता श्यामलाल जोकचंद एवं जिला पंचायत सदस्य दीपकसिंह गुर्जर के नेतृत्व में सैकड़ों किसान, ग्रामीण और कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने विशाल बाइक रैली निकालकर चंबल कॉलोनी स्थित अधीक्षक यंत्री कार्यालय का घेराव किया और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बीपीएल चौराहा से शुरू हुई रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बिजली विभाग कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने करीब एक घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप था कि जिलेभर में अघोषित बिजली कटौती से आमजन और किसान परेशान हैं, जबकि विभाग समस्याओं के समाधान के बजाय कार्रवाई और वसूली पर अधिक ध्यान दे रहा है।
सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को कथित रूप से झूठे प्रकरणों में फंसाया जा रहा है और भारी-भरकम बिल थमाकर आर्थिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विजिलेंस कार्रवाई के नाम पर किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
दीपकसिंह गुर्जर ने कहा कि विभाग में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नए कनेक्शन, ट्रांसफार्मर बदलने और लाइन सुधार जैसे कार्यों में अनावश्यक देरी से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली गुल रहने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने जर्जर बिजली लाइनों, टूटे तारों, बार-बार फुंक रहे ट्रांसफार्मरों और लाइनमैनों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है, वहीं सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
प्रदर्शन के बाद किसानों और ग्रामीणों ने बिजली विभाग को ज्ञापन सौंपकर अघोषित कटौती बंद करने, विद्युत व्यवस्था में सुधार करने, किसानों पर दर्ज कथित प्रकरणों की समीक्षा करने तथा दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा देने की मांग की।
मुख्य मांगें
- अघोषित बिजली कटौती तत्काल बंद हो।
- जर्जर विद्युत लाइनों और टूटे तारों की मरम्मत हो।
- किसानों पर दर्ज कथित फर्जी प्रकरणों की जांच हो।
- दुर्घटनाओं में मृत व्यक्तियों एवं पशुपालकों को शीघ्र मुआवजा मिले।
- ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाकर बिजली व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो गांव-गांव में आंदोलन तेज किया जाएगा और जिलेभर में व्यापक जनसंघर्ष छेड़ा जाएगा।