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खंडवा मे फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का एक बड़ा मामला] कोर्ट ने हॉस्टल अधीक्षक मोहन सिंह काजले को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कारावास और 27 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

भोपाल। मध्यप्रदेश, खंडवा मे फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस प्रकरण में कोर्ट ने हॉस्टल अधीक्षक मोहन सिंह काजले को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कारावास और 27 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सह आरोपी उसकी सास भगवती बाई को भी दोषी मानते हुए 6 माह की जेल और 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। मामला मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का है।
जांच में यह सामने आया कि आरोपी मोहन सिंह काजले ने स्नातक की फर्जी अंकसूची तैयार कराकर शासकीय नौकरी हासिल की थी। इसी आधार पर वह लगभग 10 वर्षों तक खरगोन जिले में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहा। बाद में वह खालवा क्षेत्र में पदस्थ हुआ, जहां आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत हॉस्टल अधीक्षक के रूप में उसे जिम्मेदारी दी गई।
छैगांव माखन में पदस्थापना के दौरान आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई, जिसके बाद विभागीय जांच कराई गई। जांच में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। वर्ष 2021 से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
लगभग पांच वर्षों तक चली सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2026 को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी ने आरोपी मोहन सिंह काजले को दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे 3 साल के कारावास के साथ 27 हजार रुपए का अर्थदंड दिया। वहीं सह आरोपी भगवती बाई को 6 माह की सजा और 2 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया गया।
जांच के दौरान पुलिस जब आरोपी के घर शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच के लिए पहुंची, तो उसकी सास भगवती बाई ने कथित रूप से फर्जी मार्कशीट को फाड़ दिया और पुलिस कार्रवाई में बाधा डाली। इसी आधार पर उसे मामले में सह आरोपी बनाया गया था। खंडवा न्यायालय ने फैसला सुनाया तो आरोपी मीडिया वालों से चेहरा छिपाने के लिए मुंह पर कपड़ा रखकर न्यायालय परिषर में ही दौड़ लगाने लगा।
कोर्ट के फैसले के बाद अब आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा आरोपी की सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर लापरवाही और फर्जीवाड़े की बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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