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केन्द्र सरकार द्वारा नई अफीम नीति वर्ष 2025-26 घोषित हुई, न्यायालय द्वारा दोष मुक्त सभी किसान अफीम लायसेंस के लिए पात्र होंगे

Madha Pardesh //मंदसौर। किसान तरह तरह की फसलों की खेती करके अपनी आय में बढ़ोतरी कर रहे हैं और सरकार भी चाहती है कि किसान अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की खेती करके अपनी आय बढ़ाएं। ऐसे में अफीम की खेती किसानों के लिए काफी मुनाफा देने वाली साबित हो सकती है, लेकिन अफीम की खेती भारत सरकार की अनुमति के बिना नहीं की जा सकती है। इसके लिए भारत सरकार लाइसेंस जारी करती है, उसी के बाद किसान अफीम की खेती कर सकते हैं।

इस बार सरकार ने किसानों को अफीम की खेती के लिए लाइसेंस देने की घोषणा की है। यह घोषणा नई अफीम नीति वर्ष 2025-26 घोषित, अफीम किसानों के लिए बड़ी राहत मिलना तय है। एनडीपीएस प्रकरण न्यायालय द्वारा दोष मुक्त कर दिए गए है वे सभी किसान अफीम लायसेंस के लिए पात्र होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार किसानों के हक में निर्णय लिए जा रहे है। विशेषकर अफीम किसानों के लिए नई अफीम नीति वर्ष 2025-26 से राहत मिलेगी और किसानों को इससे लाभ मिलेगा। इस पॉलिसी में किसानों के द्वारा दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार ने फिर एक बार किसान हितेषी अफीम पॉलिसी को जारी किया है।

सीपीएस पद्धति के लिए खेती के जो किसान पात्र हो गए हैं, उन्हें आगामी 5 वर्षों के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे, जो कि फसल वर्ष 2025-26 से जारी होकर फसल वर्ष 2029-30 तक प्रभावी रहेंगे। पात्र काश्तकारों के नाम सीबीएन वेबसाइट और सीबीएन ऑनलाइन पॉर्टल पर अपलोड किए जाएंगे तथा उन्हें मोबाइल नंबर पर संबंधित संदेश, मेल आदि माध्यमों से सूचित किया जाएगा। ऐसा करने से किसान पॉलिसी जारी होने के कुछ समय के भीतर ही पात्रता सूची में अपना नाम देख सकेंगे। सरकार का यह कदम लाइसेंस वितरण प्रक्रिया को सरल व सहज करेगा। इससे पारदर्शिता भी आएगी। अब किसान ऑनलाइन फॉर्म भरकर लाइसेंस प्राप्त कर सकता है तथा पात्र किसानों की सूची भी वेबसाइट पर अपलोड हो जाएगी। सीपीएस पद्धति के अंतर्गत ऐसे किसान जिन्होने वर्ष 2024-25 में पोस्ता भूसा 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से अधिक तुलवाया है वह सभी किसान इस वर्ष चीरा पद्धति से अफीम खेती कर सकेंगे। वे किसान जिन्होने 4.2 से अधिक मार्फिन जमा कराई है वे सभी किसान इस वर्ष भी चीरा पद्धति में पात्र होंगे। ऐसे किसान जो वर्ष 2023-24 प्रति हेक्टेयर 675 किलोग्राम से कम पोस्ताभूसा की उपज देने के कारण फसल वर्ष 2024-25 के लिए निलंबित किए गए थे उन किसानों को राहत प्रदान करते हुए इस वर्ष अफीम खेती करने के लिए पात्र होंगे।

वर्ष 1995-96 के बाद के वे सभी अफीम किसान जो पिछले वर्ष की नीतियों में अफीम लायसेंस के लिए पात्र थे परंतु किसी कारण से लायसेंस जारी नही हुए या फिर अफीम खेती नही कर पाए ऐसे सभी किसान और उनके वैध वारिस लायसेंस के लिए पात्र होंगे। वर्ष 2023-24 एवं 2025-26 में अपनी संपूर्ण खड़ी पोस्ता फसल संबंधित अधिकारियों की निगरानी में जुताई करा दी गई हो, लेकिन वर्ष 2022-23 के दौरान अपनी पूरी फसल न जुतवाई हो ऐसे किसान अफीम फसल वर्ष 2025-26 में पात्र होंगे। इसी के साथ ही वे किसान जो फसल वर्ष 2024-25 में लायसेंस पाने के पात्र थे और किसी कारणवश पट्टा प्राप्त नही कर पाये ऐसे किसान भी इस वर्ष अफीम लायसेंस के लिए पात्र होंगे।

ऐसे किसान जिनके लायसेंस एनडीपीएस प्रकरण के कारण निरस्त कर दिए गए थे परंतु न्यायालय द्वारा दोष मुक्त कर दिए गए है तो वे सभी किसान भी अफीम लायसेंस के लिए पात्र होंगे। ऐसे अफीम किसान जिन्होने 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम पोस्त भूसा तुलवाया है उनके लायसेंस भी निरस्त ना करते हुए केवल एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित किए गए है परंतु उनके पास अगले फसल वर्ष के लिए लायसेंस बना रहेगा। इसी के साथ ही यदि काश्तकार चाहे तो लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र को पूरा करने के लिए दूसरों की भूमि को पट्टे पर ले सकता है।

 

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सरकार ने फसल वर्ष 2025-26 के मद्देनजर मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अफीम पोस्त की खेती के लिए वार्षिक लाइसेंसिंग नीति की घोषणा की


लगभग 1.21 लाख किसान लाइसेंस हासिल करने के पात्र हैं- किसान लाइसेंस में 23.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, इन तीन राज्यों में पिछले फसल वर्ष की तुलना में अतिरिक्त 15,000 अतिरिक्त किसानों को शामिल किया गया है

नई दिल्ली। 12 SEP 2025 2:16PM by PIB Delhi

केंद्र सरकार ने आज मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अफीम पोस्त की खेती के लाइसेंस संबंधी वार्षिक लाइसेंसिंग नीति की घोषणा की। यह नीति 1 अक्टूबर, 2025 से 30 सितंबर, 2026 फसल वर्ष के दौरान जारी रहेगी।

नीति की सामान्य शर्तों के अनुसार, इन राज्यों में लगभग 1.21 लाख किसान अफीम की खेती के लाइसेंस प्राप्त करने के पात्र है। यह पिछले फसल वर्ष में जारी किए गए लाइसेंसों की संख्या से 23.5 प्रतिशत अधिक है । इस प्रकार लगभग 15,000 अतिरिक्त किसान इस नीति से जुड़े है, जिन्हें इस वर्ष अफीम की खेती से लाभ मिलने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार चिकित्सा और उपशामक देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एल्कलॉइड की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसके साथ ही, आवश्यक मादक औषधियों के उत्पादन हेतु एल्कलॉइड की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से, स्वदेशी और आत्मनिर्भर उपायों के माध्यम से प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

वार्षिक लाइसेंस नीति की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • मौजूदा अफीम गोंद उत्पादकों को बनाए रखना जिन्होंने प्रति हेक्टेयर 4.2 किलोग्राम या उससे अधिक औसत मॉर्फिन उपज (एमक्यूवाई-एम) हासिल की है
  • 3.0 किलोग्राम से 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच मॉर्फिन उपज वाले मौजूदा अफीम गोंद उत्पादक अब पांच साल की लाइसेंस वैधता के साथ, पोस्ता भूसा सांद्रण (सीपीएस) विधि के तहत चीरा लगाए बिना पोस्ता भूसे की खेती करने के पात्र हैं।

इसके अलावा, 1995-96 से किसानों की संख्या के कंप्यूटराइजड रिकॉर्ड (डिजिटलीकरण) से समावेशिता बढ़ी है, जिससे पिछले वर्षों के सीमांत किसानों को निर्धारित पात्रता और शिथिल मानदंडों को पूरा करके लाइसेंस प्राप्त करने में मदद मिली है।

सरकार का बेहतर प्रदर्शन करने वाले उन किसानों को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव है, जिन्होंने 900 किलोग्राम/हेक्टेयर या उससे अधिक अफीम की उपज प्राप्त की है, और उन्हें अफीम गोंद की खेती की पारंपरिक विधि अपनाने का विकल्प प्रदान करती है। इस बदलाव का उद्देश्य उनकी जोतों से अफीम की अधिक पैदावार को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही यह खेत से अफीम के अन्य स्रोतों के उपयोग के जोखिम को कम करने के लिए एक सकारात्मक सुदृढ़ीकरण तंत्र के रूप में भी कार्य करेगा।

सरकार सीपीएस खेती के तहत फसल वर्ष 2025-26 के लिए उन किसानों के लाइसेंस निलंबित करेगी, जिन्होंने पिछले फसल वर्ष (2024-25) के दौरान 800 किलोग्राम/हेक्टेयर की निर्धारित न्यूनतम योग्यता उपज (एमक्यूवाई) को पूरा नहीं किया था।

सरकार अपने अफीम और अल्कलॉइड कारखानों की क्षमता बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष, नीमच स्थित सरकारी अल्कलॉइड कारखाने को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से जीएमपी प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस नीति का उद्देश्य सरकारी नियंत्रित अल्कलॉइड इकाइयों के लिए आत्मनिर्भरता को संतुलित करने के साथ अल्कलॉइड एपीआई और फॉर्मूलेशन में भारतीय दवा कंपनियों को सहयोग प्रदान करना है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और ब्रांड विश्वसनीयता का लाभ उठाकर, इस पहल का उद्देश्य मेक फॉर वर्ल्ड विजन को बढ़ावा देना है।

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