नीमच के अक्षांश के आधार पर भी 1 नवम्बर 2024 को ही हर हालत में दीपोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत व उत्तम फलदायी है-कर्मकाण्डीय विप्र परिषद
Madhya Pardesh//नीमच। ज्ञात इतिहास में सबसे पहले दीपावली मनाने का उल्लेख भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास के उपरान्त पुनः अयोध्या आने पर अयोध्यावासियों द्वारा प्रसन्नतापूर्वक दीप जलाकर करने का मिलता है। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के पदचिन्हों पर चलते हुए एवं सनातन परम्परा का निर्वहन करते हुए रामजन्मभूमि पर जिस दिन दीपोत्सव मनाया जाना है, यानि कि 1 नवम्बर 2024 उसी दिन सभी सनातन मतावलम्बियों को दीपोत्सव मनाना चाहिए।
उक्त आशय के बयान जारी करते हुए कर्मकाण्डीय विप्र परिषद के संरक्षक पं.मालचंद शर्मा एवं अध्यक्ष पं.राधेश्याम उपाध्याय ने बताया कि व्रत-उत्सव, पर्व आदि का निर्णय करने के लिए प्रामाणिक व प्राचीन धर्मग्रंथ धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु के अनुसार भी 1 नवम्बर को ही दीपोत्सव लक्ष्मी पूजा मनाना शास्त्र सम्मत व फलदायी है। नीमच के अक्षांश के आधार पर भी 1 नवम्बर 2024 को ही हर हालत में दीपोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत व उत्तम फलदायी है। इसके विरूद्ध मत रखने वाले अपने प्रमाण प्रस्तुत करें। कर्मकाण्डीय विप्र परिषद समाधान/शास्त्रार्थ हेतु तैयार है।
अतः परिषद के समस्त सदस्यों के मत से हमारे यजमान महालक्ष्मी के कृपापात्र बनें तथा अपार धन वैभव से पूर्ण होकर सदा सर्वदा प्रसन्न रहें, इसके लिए परिषद की आज्ञा/अपेक्षा/निवेदन है कि दीपोत्सव 1 नवम्बर 2024 को ही मनावें, ताकि मर्यादा बनी रहे, शास्त्रों का उल्लंघन न हो। यही सबके लिए हितकारी है। नीमच के सभी प्रमुख मन्दिरों में 1 नवम्बर को दीपावली एवं 2 नवम्बर को अन्नकूट मनाया जाएगा।