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आज अनंत चतुर्दशी पर आज होगा गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन, सूर्यास्त से पहले विसर्जन की परंपरा, मिट्टी की छोटी प्रतिमा का घर में भी कर सकते हैं विसर्जन, साफ मिट्टी का पौधारोपण में किया जा सकता है उपयोग

भोपाल। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर आज 25 सितंबर को प्रदेश मे गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति प्रतिमा का विसर्जन दिन में किया जा सकता है, जबकि ग्रंथों में सूर्यास्त से पहले विसर्जन करने की परंपरा बताई गई है।
मिट्टी की छोटी गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर पर भी किया जा सकता है। इसके लिए साफ पानी से भरे बड़े बर्तन में पूजा के बाद प्रतिमा रखकर मिट्टी को प्राकृतिक रूप से गलने दिया जा सकता है। बाद में इस मिट्टी का उपयोग बागवानी और पौधारोपण में किया जा सकता है। हालांकि, यह तभी उचित है जब प्रतिमा में पीओपी या रासायनिक रंगों का इस्तेमाल न किया गया हो।

गणेश पुराण में मिट्टी की प्रतिमा की पूजा का उल्लेख
गणेश पुराण के अनुसार पार्वती ने अपने पिता हिमालय से गणेश उपासना की विधि पूछी थी। हिमालय ने साफ, चिकनी और कंकड़ रहित मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाकर पूजा करने की विधि बताई। मिट्टी से बनी इस प्रतिमा को पार्थिव गणेश कहा जाता है। अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद प्रतिमा को नदी या तालाब में विसर्जित करने का उल्लेख भी मिलता है।

पंचतत्वों से जुड़ा है प्रतिमा विसर्जन
बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार गणेशजी को सृष्टि के आधार के रूप में माना गया है। मिट्टी की प्रतिमा का जल में विलीन होकर प्रकृति में लौटना इसी भाव से जुड़ा है। गणपति अथर्वशीर्ष में गणेशजी को पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश सहित पंचतत्वों के स्वरूप के रूप में बताया गया है।

विसर्जन के बाद मिट्टी से पौधा लगाकर सहेजें उत्सव की याद
विसर्जन के बाद बची साफ मिट्टी में पौधा लगाकर गणेशोत्सव की याद को हरियाली से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए केवल दूर्वा या तुलसी का पौधा लगाना जरूरी नहीं है। गमले या बगीचे की जगह और पौधे की जरूरत के अनुसार कोई अन्य पौधा भी लगाया जा सकता है। जरूरत होने पर इसमें दूसरी मिट्टी भी मिलाई जा सकती है।

प्रतिमा की विदाई के बाद भी निभाएं अच्छे काम का संकल्प
प्रो. पांडेय के मुताबिक गणेश स्थापना के दौरान अच्छे कार्य करने और बुरी आदतें छोड़ने का जो संकल्प लिया जाता है, उसे विसर्जन के बाद भी जारी रखना चाहिए। गणेशजी को बुद्धि, विवेक और सही निर्णय के देवता माना जाता है। ऐसे में गणेशोत्सव के दौरान लिए गए सकारात्मक संकल्पों को दैनिक जीवन में अपनाना ही उत्सव की भावना को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।

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