श्री पशुपतिनाथ मंदिर का महाघंटा खामोश, फिर गूंज सुनने को भक्तों में बढ़ रही लालसा, मंदिर प्रबंध समिति मंदसौर (मध्यप्रदेश ) की बैठक में उठेगा मामला, निर्णय की उम्मीद
मंदसौर। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विशाल महाघंटे की गूंज पिछले कुछ समय से सुनाई नहीं दे रही है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस महाघंटे के बंद होने को लेकर भक्तों में चर्चा बढ़ रही है। कुछ जागरूक श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से मंदिर प्रबंध समिति से सवाल भी उठाए हैं, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मंदिर प्रबंधक राहुल रूलवाल ने बताया कि महाघंटे से जुड़े विषय को सोमवार को आयोजित होने वाली श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में रखा जाएगा। बैठक में जो निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञात हो कि श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर स्थित सहस्त्र शिवलिंग मंदिर के समीप स्थापित 37 क्विंटल (लगभग 3700 किलोग्राम) वजनी महाघंटा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसे देश के विशाल मंदिर घंटों में शामिल माना जाता है। लगभग 7.5 फीट ऊंचाई और 6.5 फीट व्यास वाले इस अष्टधातु निर्मित महाघंटे की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती रही है।
यह महाघंटा केवल धातु की विशाल संरचना नहीं, बल्कि जनभागीदारी, श्रद्धा और धार्मिक भावना का प्रतीक है। श्री पशुपतिनाथ मंदिर आने वाले देशभर के श्रद्धालुओं के लिए यह विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
श्रद्धालुओं के सहयोग से बना था महाघंटा
महाघंटे की स्थापना के पीछे श्रीकृष्ण कामधेनु सामाजिक एवं धार्मिक संस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संस्था ने वर्ष 2017 में मंदिर परिसर में विशाल घंटा स्थापित करने का संकल्प लिया था। इसके बाद जिलेभर में यात्राएं निकालकर श्रद्धालुओं से पुराने तांबे और पीतल के बर्तन तथा आर्थिक सहयोग एकत्रित किया गया।
अभियान के दौरान करीब 25 क्विंटल धातु दान स्वरूप प्राप्त हुई। इस धातु को गुजरात के अहमदाबाद भेजा गया, जहां विशेषज्ञ कारीगरों की टीम ने लगभग छह माह की मेहनत से महाघंटे का निर्माण किया। मजबूती और गुणवत्ता के लिए इसे प्राकृतिक शीतलन प्रक्रिया के तहत लगभग डेढ़ माह तक जमीन में दबाकर रखा गया।
महाघंटे के निर्माण, ढलाई, अतिरिक्त धातु, परिवहन और स्थापना सहित पूरे प्रकल्प पर लगभग 36 लाख रुपये की लागत आई थी। इसे स्थापित करने के लिए विशेष लोहे का मजबूत ढांचा तैयार किया गया और करीब तीन मीटर गहरी नींव बनाकर भारी क्रेन की सहायता से स्थापित किया गया।
दूर तक गूंजती थी आवाज
महाघंटे की गंभीर और मधुर ध्वनि इसकी सबसे बड़ी विशेषता रही है। घंटा बजने पर इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती थी और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से भर उठता था।
हालांकि वर्तमान में इसकी गूंज बंद है, जिससे श्रद्धालुओं में निराशा है। भक्तों की इच्छा है कि जल्द से जल्द महाघंटे को पुनः प्रारंभ किया जाए, ताकि श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में पहले की तरह आध्यात्मिक वातावरण लौट सके।
अब सभी की निगाहें मंदिर प्रबंध समिति की बैठक पर टिकी हैं। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि समिति इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेकर महाघंटे की गूंज फिर से शुरू करवाने की दिशा में कदम उठाएगी।
