ब्रेकिंग
एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री का पर्दाफाश, मंदसौर जिला पुलिस की बड़ी कार्रवाईः सीतामऊ में 110 ग्राम ए... स्मार्ट मीटर के विरोध में चक्का जाम, उपभोक्ताओं ने सड़क पर रखे मीटर नशे से दूरी है जरूरी अभियान 2.0 के अंतर्गत मंदसौर जिला पुलिस अधिक्षक विनोद कुमार मीना के दिशा निर्दे... मध्यप्रदेश, पूरे देश का इकलौता राज्य है, जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थि... गुरु पूर्णिमा पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं, सीएम डॉ. मोहन यादव ने ... नवागत कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने भगवान पशुपतिनाथ के किए दर्शन, मंदसौर में हुआ स्वागत भारतीय डाक विभाग के र्कचारी पर अमानत में खयानत का आरोप, सीतामऊ पुलिस ने दर्ज किया मामला अवैध शराब के साथ आरोपी गिरफ्तार, पिपलिया मंडी पुलिस की कार्रवाई अवैध शराब के खिलाफ मंदसौर जिले में पुलिस की कार्रवाई, छह आरोपी गिरफ्तार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर मनोज तिवारी का बयान, कहा- छात्र हित में उठाए गए कदम के लिए धन्यवाद

राज्यसभा चुनावः भारतीय जनता पार्टी द्वारा महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने के बादतीसरी सीट पर सियासी संग्राम तेज, क्या मध्य प्रदेश में होगा बड़ा खेला?

May be an image of one or more people, dais and temple

भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने के बाद चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और चर्चा का विषय बन गया है। जहां कांग्रेस अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रही है, वहीं भाजपा ने तीसरी सीट पर भी दावा ठोककर सियासी हलकों में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के पास तीसरा राज्यसभा सांसद बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है। इसके बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारकर भाजपा लोकतांत्रिक परंपराओं को चुनौती देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में मतदान करेंगे।

पटवारी ने कहा कि भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए अभी भी 8 से 10 अतिरिक्त विधायकों की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक दबाव और प्रलोभनों के जरिए चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी तीसरी सीट के लिए भी पूरी मजबूती से चुनाव लड़ रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने महेश केवट को राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने पर बधाई देते हुए इसे संगठन और समाज के कार्यकर्ताओं का सम्मान बताया है। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी महेश केवट को शुभकामनाएं देते हुए उनके अनुभव और सामाजिक जुड़ाव की सराहना की है।

क्या कहता है विधानसभा का गणित?

230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से कांग्रेस के पास 6 वोट अतिरिक्त हैं और यदि सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो मीनाक्षी नटराजन की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

वहीं भाजपा के पास 164 विधायक हैं। अपने दो उम्मीदवारों को सुरक्षित जिताने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचते हैं। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 58 वोटों की जरूरत होगी, यानी करीब 10 अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा।

क्या भाजपा किसी बड़े राजनीतिक खेल की तैयारी में है?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा ने महेश केवट को केवल औपचारिक उम्मीदवार के रूप में नहीं उतारा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारना भाजपा की एक रणनीतिक चाल हो सकती है, जिसके जरिए वह कांग्रेस में संभावित असंतोष, क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थिति की संभावनाओं पर दांव खेल रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि कांग्रेस के कुछ विधायक मतदान के दौरान पार्टी लाइन से अलग जाते हैं तो मुकाबला अचानक बदल सकता है। कांग्रेस के भीतर विभिन्न गुटों की सक्रियता और पिछले वर्षों में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं के पुराने संपर्कों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार दावा कर रहा है कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है।

2016 और 2020 की यादें भी चर्चा में

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वर्ष 2016 में राज्यसभा चुनाव के दौरान भी ऐसे समीकरणों की चर्चा हुई थी, लेकिन भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। वहीं 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बदले सियासी परिदृश्य को देखते हुए इस बार विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी तीसरी सीट

राज्यसभा की तीसरी सीट अब केवल एक संसदीय सीट नहीं रह गई है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है। कांग्रेस इसे अपने संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा मान रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक प्रबंधन और रणनीतिक क्षमता की कसौटी के रूप में देख रही है।

अब सबकी निगाहें मतदान और मतगणना पर टिकी हैं। विधानसभा का गणित फिलहाल कांग्रेस के पक्ष में दिखाई देता है, लेकिन राज्यसभा चुनाव की राजनीति में अंतिम परिणाम तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट इस समय प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित और रोमांचक मुकाबला बन चुकी है।

Image

Imageमध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव में अब तीसरी सीट सबसे दिलचस्प मुकाबले में बदल गई है। भाजपा ने अपने दो तय उम्मीदवारों के अलावा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को सीधा कांग्रेस की मीनाक्ष नटराजन के खिलाफ कर दिया है। दोनों नेताओं ने नामांकन दाखिल कर दिया है और अब राजनीतिक लड़ाई शुरू हो चुकी है।

भाजपा के पास अपने संख्याबल के आधार पर दो सीटें लगभग सुरक्षित मानी जा रही थीं, लेकिन तीसरा उम्मीदवार उतारकर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह तीसरी सीट पर भी जीत का दावा कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दांव कांग्रेस की एकजुटता, विधायकों की निष्ठा और संभावित क्रॉस-वोटिंग की संभावना की परीक्षा भी है।

वहीं कांग्रेस ने भी पूरी ताकत के साथ मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में एकजुटता दिखाई है। नामांकन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के जरिए पार्टी ने संदेश दिया कि वह तीसरी सीट पर मुकाबले के लिए तैयार है।

राजनीतिक मायने
भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर चुनाव को औपचारिक प्रक्रिया से राजनीतिक मुकाबले में बदल दिया है।
कांग्रेस के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है क्योंकि तीसरी सीट उसके खाते में जाने की उम्मीद जताई जा रही थी।
यदि कहीं भी क्रॉस-वोटिंग या रणनीतिक मतदान होता है तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।
18 जून को होने वाला मतदान अब सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि दोनों दलों की संगठनात्मक ताकत का भी परीक्षण माना जा रहा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.