प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 की आधी रात को देश पर थोपे गए ‘आपातकाल’को आज 50 वर्ष पूरे हो गये- केबीनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
केबीनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा आज संविधान की प्रतियां हाथ में लहराने का नाटक करने वालों को यह स्मरण रखना ही होगा कि आपातकाल वास्तव में भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचलने का प्रयास था। यह संविधान की हत्या की सोची-समझी रणनीति थी।
Madhya Pardesh//मंदसौर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा एंव संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के निर्देशानुसार एंव भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में जिला मुख्यालय मंदसौर पर आपातकाल की विभीषिका को याद करते हुए मीसाबंदी सम्मान समारोह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एंव मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता के रूप मे कहा की आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर तत्कालीन कांग्रेस की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 की आधी रात को देश पर थोपे गए ‘आपातकाल’को आज 50 वर्ष पूरे हो गये है। भारत की जनता ने तब तानाशाही के विरुद्ध स्वतंत्रता की एक और लड़ाई लड़ी थी। इस बार लड़ाई अपने ही दिग्भ्रमित सत्तालोलुप नेताओं से थी, जिसमें देश एक बार फिर विजेता बनकर उभरा था। पिछले कुछ वर्षों से कुछ विपक्षी नेता संविधान की प्रति हाथ में लिए भाषण देते दिखाई देते रहे हैं। बात-बात में संविधान की दुहाई देने का क्रम चल रहा है। जबकि वास्तविकता में उन्हीं के परिवारजनों एंव उन्ही की कांग्रेस पार्टी ने संविधान की हत्या कर आपातकाल लगाया था। भारत के स्वस्थ और मजबूत लोकतांत्रिक वातावरण में भी ‘लोकतंत्र व संविधान बचाने’ के लिए सभाओं के प्रहसन चल रहे हैं। आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर यह अवसर है जब मुड़कर इतिहास को फिर से देखने की आवश्यकता है। आज के युवा भाजपा कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी के इस इतिहास से भी रूबरू होने की आवश्यकता है। उन्हे पता होना चाहिए की आज पार्टी का जो विशाल वट वृक्ष दिखाई दे रहा है उसके पीछे उन हजारों पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का बलिदान और तपस्या है, जिन्होने कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के विरूद्ध आवाज उठाई और प्रदर्शन किये, अपने जीवन के उन्नीस महीने जेल में गुजारे है।
आज हम सभी कार्यकर्ताओं को ऐसे बलिदानी मीसाबंदियों एंव उनके परिवारजनों से संपर्क कर उनसे मार्गदर्शन लेना चाहिए और आपातकाल विभीषिका की जानकारी प्राप्त करना चाहिए।
आपातकाल का निर्णय किसी युद्ध या आंतरिक विद्रोह के कारण नहीं बल्कि एक प्रधानमंत्री के लोकसभा चुनाव रद्द होने और अपनी सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया राष्ट्र विरोधी निर्णय था। कांग्रेस पार्टी ने आपातकाल के इस क्रूरकाल में न केवल संवैधानिक ढांचे को कुचला बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को भी भंग किया। 12 जून 1975 को न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने अपने निर्णय में इंदिरा गांधी की जीत को अवैध करार दिया और 6 साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री नहीं रह सकती थीं। उनकी कुर्सी को गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। इससे घबराकर इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर मंत्रिपरिषद् की अनुशंसा के बगैर ही राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल लगाने की सिफारिश की, जिसे राष्ट्रपति ने 25 जून 1975 की आधी रात को मंजूरी दे दी।
आज संविधान की प्रतियां हाथ में लहराने का नाटक करने वालों को यह स्मरण रखना ही होगा कि आपातकाल वास्तव में भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचलने का प्रयास था। यह संविधान की हत्या की सोची-समझी रणनीति थी।
श्री विजयवर्गीय ने कहा कि संविधान की शपथ लेकर इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बनी थीं, किन्तु उसी संविधान की आत्मा को कुचलते हुए एक झटके में उन्होंने लोकतंत्र को तानाशाही में बदलकर रख दिया और पूरी शासन व्यवस्था को कठपुतली की तरह उपयोग किया। कांग्रेस सरकार ने विधायिका और न्यायपालिका को बंधक बनाकर सत्ता के आगे घुटने टेकने को विवश कर दिया था। प्रेस की स्वतंत्रता पर कुठाराघात किया गया। बड़े-बड़े समाचार पत्र संस्थानों की बिजली काट दी गई। समाचार पत्रों के प्रकाशन पर सेंसरशिप लगा दी गई और पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया। 21 महीने के आपातकाल का क्रूर समय नागरिकों पर हुए अत्याचारों की दारुण गाथा है। जहां विरोध में स्वर उठे वहां क्रूरता के साथ दमन किया गया। लोकतंत्र में आस्था रखने वाली हर आवाज को दबाया गया। मीसा जैसे काले कानून में लगभग एक लाख लोगों को बिना किसी सुनवाई के जेलों में डाला गया। जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह जैसे अनेक वरिष्ठ विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों यहां तक कि छात्रों तक को जेल में बंद करा दिया। जेलों में अमानवीय यातनाएं दी गईं। बीमार होने पर दवाएं तक नहीं दी गईं। महिला बंदियों के साथ असम्मानजनक और अमानवीय व्यवहार किया गया।
श्री विजयवर्गीय ने आगे कहा की लोकतंत्र की रक्षा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका और संघर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है। डरी हुई सरकार ने आपातकाल लगाने के पांच दिन बाद ही सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस को गिरफ्तार कर लिया। जयप्रकाश नारायण ने अपनी गिरफ्तारी से पहले लोक संघर्ष समिति का नेतृत्व संघ के पूर्णकालिक नानाजी देशमुख को सौंप दिया था, बाद में उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। आरएसएस, जनसंघ, एबीवीपी और कई अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगाकर कांग्रेस द्वारा कठोर दमन चक्र चलाया गया। एक लाख स्वयंसेवक एवं विचार परिवार के कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय साधारण कार्यकर्ता हुआ करते थे और उन्हीं की तरह लाखों स्वयंसेवकों ने आपातकाल विरोधी आंदोलन जारी रखा। रातों-रात रेलों में आपातकाल विरोधी पर्चे बांटे, मीसा बंदियों के परिवारों की देखरेख की, भूमिगत रहते हुए आंदोलन की गति बनाए रखी और कांग्रेस की सच्चाई घर-घर तक पहुंचाई।
श्री विजयवर्गीय ने आगे कहा कि ‘इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा’ जैसे नारों से आपातकाल के समय में कांग्रेस ने देश को व्यक्ति पूजा और परिवारवाद की प्रयोगशाला बना दिया। बिना किसी संवैधानिक दायित्व के संजय गांधी देश की नीतियों पर निर्णय ले रहे थे। वह आपातकाल में सत्ता का वास्तविक केंद्र थे। देश के नागरिकों पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस आज भी इसी परिवारवाद के सीमित सांचे में सिमटकर रह गई है। मुझे आज मंदसौर जिले के इस कार्यक्रम में देवतुल्य मीसांबदीं वरिष्ठजनों का सम्मान कर गर्व महसुस हो रहा है। इनके त्याग तपस्या और बलिदान का ही फल है की आज देश में भाजपा के 14 करोड़ से भी अधिक सूचिबद्ध है। आज भाजपा देश की ही नही विश्व की सबसे बड़ी कार्यकर्ता आधारित पार्टी बन चुकि है।
मीसाबंदी एंव उनके परिवारजनों का सम्मान किया
मीसांबदी पूर्व विधायक देवीलाल धाकड़, मदनलाल राठौर, हंसराज कबाड़ी, मनोहरलाल जैन, कांतिलाल रूनवाल, गोपाल पटवा, सुरेंद्र सिंह खेजडिया, राजेंद्रसिंह गौतम, विष्णु सेन कच्छावा, समरथमल खमेसरा, नारायण सिंह चौहान, विनोद पुरोहित एडवोकेट, गोपाल राठौर सीतामऊ, ओमप्रकाश बिल्लोरिया मंदसौर, स्व.ओमप्रकाश जी पुरोहित पुत्र क्षितिज पुरोहित, स्व.मोहनलाल जी मरच्या पुत्र देवेंद्र कुमार मरच्या, स्व.देवीलाल जी रियार पुत्र दिनेश रियार, स्व.चम्पालाल जी आर्य पुत्र राजेंद्र आर्य, स्व.कांति चंद्र जी मिंडा पुत्र अरविंद मिंडा, स्व.मोहन सिंह जी गौतम पुत्र राजेंद्र सिंह गौतम, स्व.किशोर सिंह जी सिसोदिया पौत्र भानुप्रताप सिंह सिसोदिया, स्व.गोविंद राम जी टेलर पुत्र ओम प्रकाश टेलर, स्व. लक्ष्मीनारायण परिहार पौत्र महेंद्र परिहार, स्व.तुलसीराम जी मामा पुत्र हेमंत रोचवानी, स्व.राजेंद्र जैन गरोठ धर्मपत्नी श्रीमती जैन, स्व.चंपालाल जी आर्य के पुत्र वीरेंद्र आर्य, स्व.कांतिचंद जी मिंडा़ के पुत्र प्रवीण मिंडा, स्व.परमजीत चावला पुत्र सन्नी चावला, गोविंद नागदा, स्व.रामचन्द्र जी भाया जी के परिवारजन, स्व.मिश्रीलाल जी फाफरिया के पुत्र बलवंत फाफरिया आदि मीसाबंदी एंव उनके परिवारजनों का शॉल, दुपट्टा और श्रीमद् भगवत गीता भेंट कर सम्मान किया गया। 