मध्यप्रदेश को मिलेगा खेल विकास का नया अवसर, गांव से वैश्विक मंच तक पहुंचेगी प्रतिभा, खेलों के साथ स्वस्थ और सशक्त भारत का निर्माण, तकनीक और खेल विज्ञान से बढ़ेगी खिलाड़ियों की क्षमता, विकसित भारत 2047 की दिशा में खेल शक्ति
नई खेलो इंडिया योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, रू.36,441 करोड़ से तैयार होगी गांव से ओलंपिक तक खिलाड़ियों की विकास यात्रा
भोपाल। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत में खेल संस्कृति को नई दिशा मिल रही है। केंद्र सरकार की नई खेलो इंडिया योजना का उद्देश्य गांवों और जमीनी स्तर से लेकर ओलंपिक स्तर तक खिलाड़ियों की संपूर्ण विकास श्रृंखला तैयार कर भारत को विश्व की खेल महाशक्ति बनाना है। योजना के माध्यम से प्रतिभा पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, बेहतर अधोसंरचना और अंतरराष्ट्रीय अनुभव उपलब्ध कराकर खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार किया जाएगा।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से खेलों को गांव, स्कूल और सामान्य परिवारों तक पहुंचाने का कार्य किया है। ओलंपिक एवं पैरालंपिक खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम को मजबूती तथा खेल संस्थानों में बढ़ता निवेश इसी सोच का परिणाम है कि भारत की खेल शक्ति करोड़ों युवाओं की प्रतिभा और क्षमता में निहित है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई खेलो इंडिया योजना के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए रू.36,441 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। इस योजना से पहले की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक खिलाड़ियों को लाभ मिलने की संभावना है। यह केवल खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभा खोज से लेकर प्रशिक्षण, उच्च स्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक तैयारी तक खिलाड़ियों को निरंतर सहयोग देने वाली राष्ट्रीय परियोजना है।
मध्यप्रदेश को मिलेगा खेल विकास का नया अवसर
नई खेलो इंडिया योजना से मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों को बड़ा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। वर्तमान में प्रदेश में 18 खेलों की 11 अकादमियां संचालित हैं। इसके साथ ही खेलो इंडिया के 52 सेंटरों को और मजबूत किया जाएगा तथा स्थानीय प्रतिभाओं के अनुसार क्षेत्रवार रणनीति तैयार की जाएगी। योजना में विद्यालयों को खेल प्रतिभा विकास का केंद्र बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय जैसी पहलें बच्चों में खेल प्रतिभा पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप खेलों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाकर शारीरिक क्षमता, अनुशासन, नेतृत्व और टीम भावना के विकास पर बल दिया जा रहा है।
गांव से वैश्विक मंच तक पहुंचेगी प्रतिभा
नई योजना के अंतर्गत इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (ई-केआईएस) जैसी पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर की युवा प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराना है। अब लक्ष्य केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की खोज करना नहीं, बल्कि उन्हें चौंपियन बनाने की मजबूत व्यवस्था तैयार करना है। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र, मान्यता प्राप्त खेल अकादमियां और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियां खिलाड़ियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
खेलों के साथ स्वस्थ और सशक्त भारत का निर्माण
नई खेलो इंडिया योजना में फिट इंडिया आंदोलन को भी व्यापक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता का आधार है। महिलाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने, सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक खेल सुविधाएं पहुंचाने, पैरा-एथलीटों और पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहन देने के साथ खेलों को सामाजिक परिवर्तन के माध्यम के रूप में विकसित किया जाएगा।
तकनीक और खेल विज्ञान से बढ़ेगी खिलाड़ियों की क्षमता
आज के दौर में खेल केवल प्रतिभा और मेहनत तक सीमित नहीं है। खेल विज्ञान, डेटा एनालिटिक्स, पोषण, रिकवरी, मनोविज्ञान और आधुनिक तकनीक खिलाड़ियों की सफलता के महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं। नई योजना के तहत डिजिटल खेल व्यवस्था विकसित कर प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण, प्रदर्शन विश्लेषण और खिलाड़ी सहायता को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जाएगा। प्रशिक्षकों की भूमिका को भी मजबूत किया जाएगा। राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से कोचिंग गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षक तकनीकी ज्ञान के साथ खेल विज्ञान, पोषण और खिलाड़ी कल्याण की समझ भी रख सकें।
विकसित भारत 2047 की दिशा में खेल शक्ति
नई खेलो इंडिया योजना वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों से लेकर भविष्य के ओलंपिक और पैरालंपिक लक्ष्यों तक भारत की खेल पहचान को मजबूत करेगी। इसका उद्देश्य ऐसा भारत बनाना है जहां गांव का प्रतिभाशाली बच्चा भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्पष्ट अवसर और मार्ग प्राप्त कर सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की नई खेल यात्रा पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल शक्ति को युवा शक्ति में बदलकर विकसित भारत 2047 के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।