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सीधी जिले में प्रधान आरक्षक बृजेश तिवारी को लोकायुक्त पुलिस ने 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया

भोपाल। मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा सीधी जिले में एक ₹15000 रिश्व वसूल रहे पुलिस अधिकारी को लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार किया गया।  सीधी जिले के रामपुर नैकिन थाना क्षेत्र के खड्डी खुर्द गांव में प्रधान आरक्षक बृजेश तिवारी ने एफआईआर से नाम हटाने के लिए आवेदक से 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसकी शिकायत मिलने के बाद रीवा लोकायुक्त पुलिस की टीम ने शुक्रवार की आधी रात को प्रधान आरक्षक के घर पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दिया।

लोकायुक्त पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गत 21 दिसंबर को दिवाकर द्विवेदी और शैलेंद्र तिवारी के बीच जमीन को लेकर हुए विवाद में मारपीट हुई थी। इस दौरान केवल एक पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में दिवाकर द्विवेदी के बेटे और भांजे का नाम भी शामिल है। दिवाकर कई बार चौकी पहुंचकर जो लोग इस मारपीट में शामिल नहीं थे, उनके नाम कटवाने की अपील कर रहे थे। एफआईआर से उनके नाम हटाने के लिए प्रधान आरक्षक बृजेश तिवारी द्वारा लगातार पैसों की मांग की जा रही थी। दिवाकर द्विवेदी ने इस घटना की शिकायत लोकायुक्त पुलिस रीवा से की। इसके बाद लोकायुक्त ने शुक्रवार देर रात करीब 11:30 बजे कार्रवाई करते हुए प्रधान आरक्षक को दिवाकर के घर के बाहर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।

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भारतीय न्याय संहिता ने पुलिस को यह अधिकार दिया है कि यदि कोई सामान्य अपराध है। गंभीर मामला नहीं है तो FIR दर्ज करने के बाद पुलिस स्वयं जमानत की कार्रवाई कर सकती है। इसके लिए कोर्ट में प्रस्तुत होने की जरूरत नहीं है।  यहां उल्लेख करना जरूरी है कि, इस मामले में पुलिस के पास जमानत नामंजूर करने और आरोपी को जेल भेजने का अधिकार ही नहीं है।

 

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