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व्यापम घोटाले मे पकड़ाय आरक्षक जितेंद्र थाना दालौदा, मंदसौर में था पदस्थ, न्यायालय से हुई 7 साल की सजा

भोपाल। व्यापम महाघोटाला का मामला थमने का नाम ही नही ले रहा है। एक के बाद एक कई मामलों के बाद एक और मामले मे विशेष न्यायालय सीबीआई (व्यापम केस भोपाल) द्वारा फर्जी ढंग से पुलिस विभाग में भर्ती हुए आरक्षक जितेन्द्र टांक पिता नागेश्वर टांक निवासी अमृतसागर कालोनी, रतलाम को सुनवाई पूरी होने पर दोषी करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास सहित 10 हज़ार रुपये के जुर्माने से दंडित किए जाने का आदेश सुनाया है। फर्जी ढंग से भर्ती हुआ आरक्षक जितेंद्र थाना दालोदा जिला मंदसौर में पदस्थ था। मामले में एसटीएफ की ओर से अदालत में विशेष लोक अभियोजक सुनील श्रीवास्तव द्वारा पैरवी की गई। जानकारी के अनुसार भोपाल एसटीएफ को व्यापम द्वारा आयोजित आरक्षक भर्ती परीक्षा 2012 में आरक्षक के पद पर चयनित जितेन्द्र टांक के खिलाफ साल्वर बैठाकर परीक्षा उत्तीर्ण करने की शिकायत मिली थी। शिकायत की जाँच में जितेंद्र द्वारा फर्जीवाड़ा करने के आरोप सही पाये जाने पर उसके विरूद्ध धारा 419, 420, 467, 468, 471 भादवि तथा 3 (घ) 4 मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम का मामला दर्ज किया गया था। छानबीन के बाद न्यायालय भोपाल में चालान पेश किया गया। प्रकरण की जांच उप निरीक्षक मलय महंत द्वारा की गई थी। विशेष न्यायाधीश सीबीआई (व्यापम केस भोपाल ) नीतिराज सिंह सिसोदिया द्वारा गवाहों के बयान सहित अन्य तथ्यों के आधार पर आरोपी जितेन्द्र टांक को दोषी करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रूपये के अर्थदंड से दण्डित किये जाने का आदेश दिया है।

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