दिल्ली। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के चेयरमैन और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ का मतलब पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से मानव विकास, खासकर शिक्षा, अर्थव्यवस्था, गवर्नेंस, उत्पादन और निवेश जैसे क्षेत्रों पर पड़ने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
पीपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘एक देश, एक चुनाव’ का विजन नया नहीं है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने इस चुनावी सुधार की कल्पना की थी, जिसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का सबसे अधिक फायदा छात्रों को, खासकर 12वीं कक्षा और कॉलेज के विद्यार्थियों को होगा। बार-बार चुनाव होने और आचार संहिता लागू होने से छात्रों के शैक्षणिक कैलेंडर, भर्ती प्रक्रिया और अन्य गतिविधियों का पूरा शेड्यूल प्रभावित होता है।
पीपी चौधरी ने बताया कि इस मुद्दे पर दस राज्यों में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्य सचिव, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, स्वास्थ्य, वित्त और पुलिस/डीजीपी से जुड़े अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। इसके अलावा सिविल सोसाइटी के सदस्यों और पद्म पुरस्कार विजेताओं से भी बातचीत हुई।
उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं के दौरान सभी की राय थी कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने चाहिए, क्योंकि मौजूदा चुनाव व्यवस्था का आम जनता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।