मंडी शुल्क में 50 प्रतिशत वृद्धि तत्काल वापस ले सरकार : कांग्रेस नेताओं ने व्यापारियों और किसानों से की चर्चा, बढ़े हुए मंडी टैक्स का किया विरोध
Madhya Pardesh/ मंदसौर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के निर्णय का विरोध तेज होने लगा है। इसी क्रम में शुक्रवार को कांग्रेस के उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ के नेतृत्व में कांग्रेसजन मंदसौर कृषि उपज मंडी पहुंचे और किसानों एवं व्यापारियों से चर्चा कर बढ़ी हुई दर को वापस लेने की मांग की।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेन्द्र सिंह गुर्जर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ निर्विकार रातड़िया, संगठन मंत्री अजय लोढ़ा सहित अन्य कांग्रेस नेता मंडी परिसर पहुंचे और व्यापारियों से मंडी शुल्क वृद्धि के प्रभाव को लेकर चर्चा की।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच व्यापारी वर्ग पहले से ही परेशान है। ऐसे समय में मंडी शुल्क बढ़ाने का निर्णय व्यापारी हितों के खिलाफ है। उन्होंने राज्य सरकार से बढ़ी हुई दर को तत्काल वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ निर्विकार रातड़िया ने कहा कि मंडी शुल्क में 50 प्रतिशत की वृद्धि से कृषि उपज के व्यापार पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। इसका सीधा प्रभाव किसानों और व्यापारियों दोनों पर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत, परिवहन खर्च और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में मंडी शुल्क बढ़ाना किसानों और व्यापारियों के हित में नहीं है।
रातड़िया ने कहा कि शुल्क वृद्धि के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन से मंडी शुल्क को पूर्ववत 1 प्रतिशत बनाए रखने तथा वृद्धि संबंधी निर्णय को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
इस दौरान दशपुर मंडी व्यापारी संघ के अध्यक्ष मनोज जैन (पप्पू भाई), पूर्व मंडी अध्यक्ष राजेन्द्र नाहर, मंडी कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल, दिनेश कल्याणी, हेमंत हीगढ़, सुनील गुप्ता, विजयवर्गीय, अरविन्द बोथरा, राजेन्द्र पारख, जितेन्द्र पोरवाल, अभिषेक जैन, बंटी कुमावत, धन्नालाल कटारिया, मनीष कटारिया, संदीप जैन सहित बड़ी संख्या में किसान एवं व्यापारी उपस्थित रहे।
