पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है, जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
नई दिल्ली । भारत की आजादी में महात्मा गांधी के बलिदान को याद करने के लिए हर साल 30 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की मृत्यु भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिसमें उसने अहिंसा, सत्य और एकता के लिए खड़े एक नेता को खो दिया। स्वतंत्रता आंदोलन के अलावा महात्मा गांधी ने समाज के हर वर्ग के लिए काम किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समझते थे कि अहिंसा कमजोरों का हथियार नहीं है, यह साहसी लोगों की ताकत है। यह घृणा के बिना अन्याय का विरोध करने, क्रूरता के बिना उत्पीड़न का सामना करने और प्रभुत्व के माध्यम से नहीं, बल्कि सम्मान के माध्यम से शांति स्थापित करने की शक्ति है। महात्मा गांधी ने न सिर्फ इन आदर्शों की बात की, बल्कि उन्हें जिया भी था। इस खतरनाक और विभाजित समय में महात्मा गांधी की इस सोच को न सिर्फ याद किया जाना जरूरी है, बल्कि उसके आत्मसात करने की खास जरूरत है।
ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी केंद्रीय भूमिका के कारण महात्मा गांधी का अत्यधिक महत्व है। अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने लाखों भारतीयों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों, बहिष्कारों और भूख हड़तालों के माध्यम से स्वतंत्रता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। विशेषकर 1930 के दांडी मार्च ने उत्पीड़न का सामना करने के लिए अहिंसा की शक्ति में उनके विश्वास को दर्शाया।
महात्मा गांधी के लिए, अहिंसा सिर्फ एक राजनीतिक साधन नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति थी, जो इस विश्वास पर आधारित थी कि शांति शांतिपूर्ण साधनों से ही हासिल की जा सकती है।
महात्मा गांधी ने कहा था, “अहिंसा मानव जाति के पास सबसे बड़ी शक्ति है। यह विनाश के सबसे शक्तिशाली हथियार से भी अधिक शक्तिशाली है।”
यह विश्वास दुनिया भर के आंदोलनों को प्रेरित करता रहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नागरिक अधिकारों के संघर्ष से लेकर दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला के रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष तक। उनके विचारों ने अनगिनत नेताओं और आंदोलनों को प्रभावित किया और प्रतिरोध के साथ ही सुधार के एक शक्तिशाली साधन के रूप में अहिंसा की सार्वभौमिक अपील को रेखांकित किया।
उनका दर्शन हमें याद दिलाता है कि शांति एक दूर का आदर्श मात्र नहीं है, बल्कि यह हासिल करने वाला लक्ष्य है। उनकी शिक्षाएं आशा और मेल-मिलाप का एक शाश्वत संदेश देती हैं। C@NEWS
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर ट्वीट महात्मका गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हे श्रद्धांजलि अप्रित की।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर मेरा शत-शत नमन। पूज्य बापू का हमेशा स्वदेशी पर बल रहा, जो विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का भी आधारस्तंभ है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व देशवासियों को कर्तव्य पथ पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।
पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है, जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है।
अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।
अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥
प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम श्री मोदी ने कहा उनके शाश्वत आदर्श हमारे राष्ट्र के मार्ग का मार्गदर्शन करते रहेंगे। हम उनके सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं और न्याय, सद्भाव और मानवता की सेवा पर आधारित भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर ट्वीट महात्मका गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हे श्रद्धांजलि अप्रित कर कहा महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं – वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफ़रत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की।
मगर राष्ट्रपिता ने हमें आज़ादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताक़त से बड़ी सत्य की शक्ति होती है – और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस।
यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं।
बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।
विपक्ष के नेता राहूल गांधी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होने कहा सत्य और अहिंसा के सबसे बड़े उपासक बापू के आदर्श हिंदुस्तान की नींव में बसे हैं, जिनसे हमें अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का हौसला और शक्ति मिलती है।