ब्रेकिंग
मध्यप्रदेश पटवारियों का आंदोलन स्थगित, शासन ने प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का दिया आश्वासन मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियानः उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने चंदवासा में किया जनसंवाद, सुनीं आमजन की... मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की शुरुआत छिंदवाड़ा से, हर शुक्रवार जनता के बीच पहुंचेंगे अधिकारीः मुख्... मंदसौर में सट्टा लिखते युवक गिरफ्तार, नगदी व सट्टा पर्ची जब्त मंदसौर विधायक विपिन जैन ने अधिकारियों की लापरवाही पर जताई बड़ी नाराजगी, विजन डॉक्यूमेंट बैठक मे बोले ... नाहरगढ़ पुलिस की जुआ फड़ पर कार्रवाई, 5 आरोपी गिरफ्तार, ताश के पत्ते व 2680 नगद जब्त नाहरगढ़ पुलिस की जुआ फड़ पर कार्रवाई, 5 आरोपी गिरफ्तार, ताश के 52 पत्ते व 2680 नगद जब्त किसानों के खेतों से लेकर उनके खातों तक का ध्यान रख रही है: राज्य सरकार - मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमपीईएसबी की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालः पंचायत समन्वय अधिकारी भर्ती में 311 पदों मे एससी को एक भी ... कवच योजना को मिली मंजूरी, 5 हजार किसानों को मिलेगा नए ऋण का लाभः सांसद बंशीलाल गुर्जर

अवैध रूप से संचालित चिल्ड्रन होम के मामले में कलेक्टर महिला एवं बाल विकास विभाग के दो परियोजना अधिकारियों को सस्पेंड

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के परवलिया पुलिस थाना क्षेत्र के गांव तारा सेवनिया में अवैध रूप से संचालित चिल्ड्रन होम के मामले में कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग के दो परियोजना अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया जबकि सहायक संचालक महिला बाल विकास को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है।
बाल आयोग ने दावा किया है कि, इस हॉस्टल के रजिस्टर में कुल 68 लड़कियों के नाम दर्द है जिनमें से निरीक्षण के समय केवल 41 लड़कियां उपस्थित मिली। शेष 26 लड़कियों के बारे में मौके पर मौजूद हॉस्टल के संचालक कोई जानकारी नहीं दे पाए। आयोग ने यह भी बताया है कि संस्था को जर्मनी से फंडिंग होती है। जो बच्चे चाइल्ड लाइन में मदद के लिए फोन लगाते थे उन बच्चों को रेस्क्यू करके इस हॉस्टल में लाया जाता था। यहां पर उन्हें एक विशेष प्रकार की प्रार्थना करने के लिए बाध्य किया जाता था।
कार्यालय कलेक्टर भोपाल की ओर से प्रेस को बताया गया है कि, गत दिवस राज्य बाल आयोग के अध्यक्ष श्री प्रियंक कानूनगो व सदस्यों ने भोपाल के तारासेवनिया में संयुक्त रूप से एक अवेध संचालित बाल गृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि बाल गृह न तो पंजीकृत है न ही मान्यता प्राप्त है। साथ ही यहाँ जो बच्चियाँ रेस्क्यू कर के लाई गई, सीडब्लूसी को उसकी सूचना भी नहीं दी गई न ही अन्य शासकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया। इस पर आयोग द्वारा संस्था के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज कराई गई।
आयोग के निरीक्षण दौरान उपस्थित मिली 41 बच्चियों को प्रशासन द्वारा पंजीकृत बाल गृह में शिफ्ट कर दिया गया है। इसी के साथ कुछ बच्चियों के फॉर्म वहाँ मिले पर वे उपस्थित नहीं मिली उनके संबंध में पूछने पर संस्था द्वारा बताया गया कि बच्चियाँ अपने घर वापस चली गई है, जिसका पुलिस के द्वारा वेरीफाई कराया जा रहा है, 12 बच्चियाँ अपने घरों पर मौजूद मिली शेष बच्चियों का पुलिस के द्वारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है।अतः बालिकाओं के ग़ायब हो जाने की जानकारी सही नहीं है।
इस मामले में पाई गई लापरवाही पर सीडीपीओ बृजेन्द्र प्रताप सिंह(वर्तमान पदस्थापना गंजबासौदा),सीडीपीओ श्रीमती कोमल उपाध्याय को निलंबित किया गया है ।साथ ही महिला बाल विकास अधिकारी सुनील सोलंकी एवं सहायक संचालक महिला बाल विकास रामगोपाल यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
Leave A Reply

Your email address will not be published.