अफीम नीति में देरी से किसानों की बढ़ी चिंता, मालवा के अफीम उत्पादक किसान असमंजस में, किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने केंद्र सरकार से नीति में किसान हितैषी संशोधन के साथ ही तत्काल घोषणा की उठाई मांग
Madhya Pardesh / मंदसौर। मध्यप्रदेश, मंदसौर/पिपलिया मंण्डी। अफीम नीति घोषित होने में हो रही देरी से मालवा क्षेत्र के अफीम उत्पादक किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आगामी फसल की तैयारियों और पट्टा व्यवस्था को लेकर किसान केंद्र सरकार की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री को पत्र लिखकर अफीम नीति तत्काल घोषित करने और किसानों के हित में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। जोकचंद ने कहा कि अफीम की खेती मालवा क्षेत्र के हजारों किसानों की आजीविका से जुड़ी है। किसान बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी सहित विभिन्न मदों में पूंजी निवेश करते हैं। समय पर नीति घोषित नहीं होने से उन्हें आगामी फसल की योजना बनाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए सरकार को बिना देरी किए स्पष्ट नीति जारी करनी चाहिए, ताकि किसानों की अनिश्चितता दूर हो सके।
सीपीएस के बजाय पारंपरिक खेती के पट्टे देने की मांग
किसान नेता ने सीपीएस पद्धति के स्थान पर पारंपरिक तरीके से चिरा लगाकर अफीम उत्पादन करने वाले पट्टे जारी करने की मांग की। उन्होंने प्रत्येक पात्र किसान को 10 आरी का पट्टा देने और अफीम की खेती से अब तक वंचित रहे पात्र किसानों को नए लाइसेंस जारी करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि पट्टा वितरण व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे अधिक से अधिक पात्र किसानों को खेती का अवसर मिल सके।
अफीम का भाव ₹1 लाख प्रति किलो करने की मांग
जोकचंद ने अफीम का मूल्य बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति किलो निर्धारित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अफीम उत्पादन में किसानों को काफी मेहनत और पूंजी लगानी पड़ती है। ऐसे में उपज का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। सरकार को उत्पादन लागत और किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मूल्य निर्धारण व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
डोडाचूरा की खरीद दर बढ़ाने और नीति में बदलाव की मांग
किसान नेता ने डोडाचूरा की खरीद दर बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति क्विंटल करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.2 प्रतिशत से कम होने की स्थिति का उल्लेख करते हुए इसे एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर करने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि डोडाचूरा से जुड़े कानूनी मामलों के कारण मालवा-मेवाड़ क्षेत्र के कई किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में स्पष्ट, व्यावहारिक और किसान हितैषी नीति बनाई जानी चाहिए। इस विषय पर निर्णय लेते समय संबंधित कानूनों और विशेषज्ञों की राय को भी ध्यान में रखने की मांग की गई।
अफीम की फसल को बीमा योजना में शामिल करने की मांग
जोकचंद ने अफीम की फसल को भी फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, प्रतिकूल मौसम और अन्य कारणों से फसल खराब होने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में किसानों को राहत देने के लिए बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि फसल खराब होने पर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।
केंद्र सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील
किसान नेता ने केंद्र सरकार से अफीम नीति तत्काल घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि इसमें पट्टा वितरण, अफीम के उचित मूल्य, डोडाचूरा की खरीद दर, नए लाइसेंस और फसल बीमा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को आगामी फसल की तैयारी के लिए समय पर स्पष्ट जानकारी मिलना आवश्यक है। सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि अफीम उत्पादक किसानों की असमंजस की स्थिति समाप्त हो और उन्हें राहत मिल सके।
