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म.प्र. मे स्टाम्प शपथपत्र पर 50 रुपए के बजाय 200 रुपए बड़ोत्री पर पुर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा की सरकार का दावा है कि इससे 220 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार को राजस्व प्राप्त करने की बेहतर तरीक़े आते ही नहीं है।

भोपाल। पुर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने  मध्यप्रदेश की अफलातूनी सरकार बताते हूए कहा की सरकार ने स्टाम्प पर 100% से पर 500% तक की वृद्धि कर दी है। महंगाई और बेरोजगारी का बोझ झेल रही मध्यप्रदेश की जनता जब-जब इस सरकार से राहत माँगती है, तब-तब ये सरकार आफ़त बनकर जनता पर ही टूट पड़ती है।

पुर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर कहा की विधानसभा में भारतीय स्टाम्प (मप्र संशोधन), जीएसटी (संशोधन), रजिस्ट्रीकरण (मप्र संशोधन) और भारतीय स्टाम्प (मप्र द्वितीय संशोधन) विधेयक पारित हो गए। शपथपत्र, पॉवर ऑफ एटॉर्नी, एग्रीमेंट, दान पत्र जैसे 12 दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क बढ़ा दिया गया है। शपथपत्र पर 50 रुपए के बजाय 200 रुपए और संपत्ति खरीद के एग्रीमेंट पर 1000 के बदले 5000 रुपए का स्टाम्प लगेगा। सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए कारगर उपाय करने चाहिए लेकिन इस सरकार की हर उपाय जनता से वसूली पर जाकर टिक जाता है। पहले सरकारें सब्सिडी से लेकर राहत के कई विकल्पों पर काम करती थी, जिससे लोक कल्याणकारी योजनाएं आकार ले पाती थीं, लेकिन अब इस सरकार और जनता के बीच केवल वसूली और पेनल्टी का ही रिश्ता बच गया है।

पुर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर कहा की मैं सरकार से मांग करता हूँ कि नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन के पहले जनता के हितों और सहूलियतों को ध्यान में रखा जाए। आवश्यकता करों में सुधार/बदलाव यदि जरूरी हो, तो भी व्यवहारिकता को ध्यान में रखकर आगे बढ़ा जाय। बजट पेश करते समय सरकार झूठी वाहवाही लूटने के लिए “कोई नया टैक्स नहीं, कोई बढ़ोतरी नहीं” जैसी घोषणाएं कर हेडलाइन्स में शामिल होती है, और फिर नकाब उतारने का दौर शुरू होता है। वृद्धि दर 10% से 20% हो तो उसे स्वीकार भी किया जा सकता है, लेकिन वृद्धि दर 500% हो तो यह बात गले से नहीं उतरती है।

 

पुर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर कहा की भाजपा सरकार ने मध्य प्रदेश की जनता पर महँगाई का एक और चाबुक चला दिया है। प्रदेश में स्टैम्प शुल्क में भारी वृद्धि कर दी गई है। जो शपथ पत्र पहले 50 रुपये में बनता था, उसका शुल्क चार गुना बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है। संपत्ति ख़रीद एग्रीमेंट के लिए स्टैम्प शुल्क एक हज़ार रुपये से पाँच गुना बढ़कर पाँच हज़ार रुपया कर दिया गया है।

इस तरह सरकार ने 12 तरह के दस्तावेजों पर बेतहाशा स्टैम्प शुल्क में वृद्धि की है। प्रदेश की जनता पहले से ही पेट्रोल, डीज़ल बिजली, संपत्ति की रजिस्ट्री, वाहन का रजिस्ट्रेशन आदि में देश में सबसे ज़्यादा टैक्स देने वाले राज्यों में शामिल है। अब स्टैम्प शुल्क में इतनी अधिक वृद्धि करके उस पर महँगाई का और बोझ डाल दिया गया है।

पुर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा की सरकार का दावा है कि इससे 220 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार को राजस्व प्राप्त करने की बेहतर तरीक़े आते ही नहीं है। अगर प्रदेश में ईमानदारी से निवेश आया होता और औद्योगिक गतिविधि बढ़ चुकी होती तो सामान्य तौर पर ही प्रदेश को कहीं अधिक राजस्व मिलता और जनता पर बोझ डालने की ज़रूरत नहीं पड़ती। लेकिन भाजपा के पास कोई औद्योगिक दृष्टिकोण नहीं है और वह सिर्फ़ मध्य युग के राजाओं की तरह जनता का खून चूस कर अपना ख़ज़ाना भरना चाहती है।

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