लोटन यात्रा निकली, वस्त्रदान, भंण्डारा हूआ, जय अम्बे जगदंबे देवडूंगरी माताजी मंदिर परिसर मे मकर सक्रांति पर्व पर भक्तो का उमड़ा जनसेलाब
मंदसौर। मध्यप्रदेश, मंदसौर के रेवास देवड़ा रोड़ स्थित चमत्कारी स्थल देवडूंगरी माताजी मंदिर परिसर पर प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी मंदिर समिति द्वारा मकर सक्रांती पर्व का आयोजन किया गया। सक्रांत रविवार को मातारानी के जयकारों के साथ लोटन यात्रा निकली, वस्त्रदान और भंण्डारे का आयोजन हूआ।
माता के गोलाजी बंशीलाल घटावदा द्वारा लोटल यात्रा निकाली गइ। मंचासीन अथ्तियों के समक्ष मातरजी की और से कई महिलाओं को वस्तदान मे साड़िया वितरीत की गई। मंदिर परिसर में मातरानी के दर्शन के लिए भक्तों का जन सैलाब उमड़ा।
कार्यक्रम मे मुख्यरूप से समिति संरक्षक मंगल राठौर, कोषाध्यक्ष बंशी राठौर, जगदीश बैरागी, राधेश्याम मारू, दिनेश जाट, बद्रीलाल जाट, रामेश्वर सौलंकी, राजकमार राठौर, बंसतीलाल भाटी, राधेश्याम गौरवी, शोभाराम सर्यवंशी, बालकिशन मीणा, शांतिलाल पोखरवाल, नानालाला धमानिया, मुकेश सूर्यवंशी, प्रकाश मेघवाल, किशोर सूर्यवंशी,राधेश्याम सीनम घटावदा सहित बुगलिया, गुजरदा, घटावदा, कोचवी, भरड़ावद,रलायता, पित्याखेड़ी, दोलतपुरा, मंदसौर प्रतापगढ़, गुजरात आदी से कई भक्त माताजी के भण्डारें मे शामिल हूए और प्रसादी का आयोजन सम्मन्न हूआ।
हजारों माता बहनों आजमनों भक्तों का देवडूंगरी माताजी के दरबार आगमन और धर्म लाभ लिया हूआ।
देवीमां के गोलाजी बंशलील घटावदा के अनुसार उल्लेखनीय है कि अम्बे रानी देव डूंगरी माता जी के दरबार मे दुर दुर से लोग लागे आते है और लोग यहां अपने घर के लिए घरोंदें बनाते है। बच्चे नही होते ता मन्नत लगाते, शादी नही हो रही हो तो मन्नत लगाते। बीमारी के कष्ट निवारण के लिए मन्नत लगाते, किसी की बोलती बंद हो जाए तो माता रानी के यहां मन्नत लगाते जिससे उनकी मननते पुरी होती है। ऐसी अनेको आस लेकर भक्त माताजी के यहां आते रहे है। माताजी उ़त्रे पहाड़ी पर विराजीत है जहां 151 सीड़ी चढ़ना पड़ती है।