अफीम भाव एवं पोस्तादाना आयात सहित अन्य मामलो में भी नवीन अफीम नीति में कोई खुलासा नही किया गया-कांग्रेस
मंदसौर। मध्यप्रदेश,मंदसौर, 13 सितम्बर को केन्द्रीय वित मंत्रालय के अधीन नारकोटिक्स कार्यालय ने नवीन अफीम नीति की घोषणा करते हुये मंदसौर सहित अन्य अफीम उत्पादक जिलो के लिये गाईड लाईन जारी कर दी। नवीन नीति में 4.2 की औसत को ही पारंपरिक खेती ( लुरनी- चिरनी ) के मापदंड के योग्य मानते हुये आगामी 24-25 के सत्र के लिये यह मापदंड 5.9 करने का ऐलान कर दिया है, यानि आगामी समय में केन्द्र सरकार पारंपरिक अफीम खेती को ओर अधिक हतोत्साहित करते हुये सीपीएस पध्दति में पट्टे बढाने की मंशा है। इसके अतिरिक्त अफीम भाव एवं पोस्तादाना आयात सहित अन्य मामलो में भी नवीन अफीम नीति में कोई खुलासा नही किया गया है।
यह बात जिला कांग्रेस प्रभारी महामंत्री एवं प्रवक्ता श्री सुरेश भाटी ने कही। उन्होनें कहा कि कुछ समय पूर्व क्षेत्रीय सांसद द्वारा अफीम नीति को लेकर सुझाव प्रस्तुत करते हुये सौगात देने का दावा किया गया था किन्तु केन्द्र द्वारा अफीम नीति से भाजपा के सभी अफीम उत्पादक क्षेत्रो के सांसदो की सक्रियता की पोल खुल गयी है। उन्होनें जारी नवीन अफीम नीति को किसान विरोधी बताते हुये कहा कि इस निति से साफ हो गया है कि केन्द्र सरकार क्षेत्र की पारंपरिक अफीम काश्त को समाप्त करना चाहती है। पारंपरिक खेती से न केवल किसानो का हित जुडा है बल्कि लुरनी चिरनी कार्य के कारण कुशल श्रमिको को रोजगार भी मिलता है लेकिन केन्द्र सरकार ने इस वर्ष की अफीम नीति में कोई भी राहत देने के साथ ही आगामी वर्ष के लिये लायसेंस पात्रता को 5.9 करके अफीम लायसेंस को ओर अधिक जटिल बना दिया है।
श्री भाटी ने कहा कि वर्तमान सीपीएस पध्दति से अफीम लायसेंस की संख्या कम है लेकिन जिन किसानो की औसत 3 से लगाकर 4.2 रही है उन्हें सीपीएस पध्दति से ही खेती करना होगी। इसके साथ ही आगामी सत्र में जिनकी उपज 5.9 से कम रहेगी वो भी सीपीएस पध्दति के दायरे में आ जायेगे। इस मान से आगामी सालो में मंदसौर संसदीय क्षेत्र की पारंपरिक अफीम खेती को समाप्त करने का षडयंत्र है। उन्होनें नवीन अफीम नीति को खुलकर विरोध करते हुये कहा कि अंचल का किसान खरीफ सीजन के बिगड जाने के कारण परेशान है, ऊपर से केन्द्र की अफीम नीति से कोई राहत मिलना तो दूर अफीम काश्तकारो के लिये आगामी दिनो में परेशानी का कारण बनेगी।