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मंदसौर में अवैध शराब पर शिकंजे की तैयारी, पिछले माह कलेक्टर के दो पत्रों से प्रशासन सक्रिय, 8 आबकारी क्षेत्रों के संवेदनशील ठिकाने चिह्नित, एसपी से लेकर एसडीएम तक को निर्देश, गांव-गांव से सूचना जुटाएंगे सरपंच, सचिव और कोटवार; पुलिस-आबकारी की संयुक्त कार्रवाई पर रहेगी नजर

मंदसौर। मध्यप्रदेश,मंदसौर जिले में अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण, बिक्री और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है।
मंदसौर में अवैध शराब के खिलाफ अभियान की सफलता केवल निर्देश जारी होने से तय नहीं होगी। नियमित निरीक्षण, स्थानीय सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई, दर्ज प्रकरणों की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और गांव-गांव से सूचना जुटाने की व्यवस्था के बाद अवैध शराब के कारोबार पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो पाता है। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई तथा प्रशासनिक निर्देशों के पालन से ही आने वाले दिनों में इसकी वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
कलेक्टर दिव्यांश सिंह ने पिछले माह 16 सितंबर 2026 को जारी दो अलग-अलग पत्रों के माध्यम से पुलिस, राजस्व, पंचायत और आबकारी विभाग को सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। एक पत्र में पुलिस अधीक्षक से संवेदनशील क्षेत्रों में आबकारी विभाग के साथ संयुक्त अभियान चलाने का अनुरोध किया गया है, जबकि दूसरे पत्र में एसडीएम और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को सरपंचों, पंचायत सचिवों और कोटवारों के जरिए अवैध शराब की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। सागर जिले की बंडा तहसील में कथित नकली अथवा अवैध शराब के सेवन से हुई जनहानि की घटना के बाद जारी इन निर्देशों का उद्देश्य जिले में ऐसी घटनाओं की आशंका को रोकना और अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि प्रशासनिक निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर कितनी कार्रवाई होती है।

कलेक्टर ने एसपी को लिखा पत्र, संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर
पिछले माह कलेक्टर कार्यालय से पुलिस अधीक्षक, मंदसौर को भेजे गए पत्र में जिले के ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है, जहां पूर्व में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री अथवा परिवहन की गतिविधियों का इतिहास बताया गया है। इन स्थानों को संबंधित आबकारी वृत्त और पुलिस थानों के साथ चिह्नित किया गया है। पत्र में संबंधित थाना प्रभारियों को आबकारी विभाग के साथ संयुक्त अभियान चलाने के लिए निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है। मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत प्रभावी कार्रवाई कर अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण, खरीद-बिक्री और परिवहन पर रोक लगाने पर जोर दिया गया है।

प्रशासनिक पत्र में मंदसौर जिले के विभिन्न आबकारी वृत्तों के अंतर्गत निम्न स्थानों का उल्लेख किया गया है-
मंदसौर पूर्व- डिगावमाली और मीखेड़ी (थाना अफजलपुर), मोरखेड़ा (थाना दलौदा)। मंदसौर पश्चिमरू वानीखेड़ी (थाना दलौदा)। सीतामऊ- शक्करखेड़ी डेरा, कचनारा डेरा, बेटीखेड़ी डेरा और गायरीखेड़ी डेरा (थाना नाहरगढ़)। सुवासरा- बसई, चंबल नदी किनारे, और टोकड़ा (थाना सुवासरा)। गरोठ- पिपल्याजत्ती डेरा और रूपारेल (थाना गरोठ)। भानपुरा- अरनियाचरण डेरा, बाबूल्दा डेरा, छतरपुरा डेरा और लेदी चौराहा डेरा (थाना भानपुरा)। गंधीसागर- नावली डेरा (थाना गांधीसागर)। कलेक्टर के पत्र के अनुसार, इन क्षेत्रों में स्लम बस्ती अथवा मदिरा दुकान नहीं होने के कारण अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन की गतिविधियों का इतिहास दर्ज है। हालांकि, सूची में नाम होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक स्थान पर वर्तमान में अवैध कारोबार की पुष्टि हो चुकी है। संबंधित क्षेत्रों में जांच और कार्रवाई के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

अब सरपंच-सचिव और कोटवार भी देंगे सूचना
कलेक्टर के दूसरे पत्र में सभी अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के सरपंचों, पंचायत सचिवों और कोटवारों को निर्देशित करने को कहा गया है। इन स्थानीय प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के माध्यम से कच्ची शराब के निर्माण, संग्रहण, बिक्री तथा अवैध परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों और संदिग्ध स्थलों की जानकारी आबकारी विभाग अथवा पुलिस तक पहुंचाई जाएगी। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संबंधित विभाग तलाशी अभियान चलाकर नियमानुसार कार्रवाई कर सकेंगे। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना तंत्र मजबूत करने और दूरस्थ बस्तियों तक प्रशासन की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई से पहले सूचना का सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा।

 

तहसीलवार आबकारी अधिकारियों को जिम्मेदारी
प्रशासन ने अवैध शराब से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त करने के लिए तहसीलवार आबकारी अधिकारियों के नाम और संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। मंदसौर में नानूराम वास्कले, दलौदा और मल्हारगढ़ में कर्मेन्द्र सावले, सीतामऊ में राजकुमारी मंडलोई, सुवासरा और भानपुरा में अमित तेकाम तथा शामगढ़ और गरोठ में सुनीता गेहलोत मालवीय को संबंधित क्षेत्रों के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अब इस व्यवस्था की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्राप्त सूचनाओं पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और संबंधित विभाग शिकायतों के निस्तारण की निगरानी किस प्रकार करते हैं।

 

अफजलपुर में 200 पेटी शराब की जब्ती ने बढ़ाई चर्चा
जिले में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के बीच अफजलपुर पुलिस द्वारा पिकअप वाहन से 200 पेटी अवैध शराब पकड़े जाने का मामला भी चर्चा में रहा। इस कार्रवाई ने जिले में शराब के अवैध परिवहन और आपूर्ति पर प्रभावी निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित किया है। अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण, परिवहन और बिक्री पर नियंत्रण आबकारी विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि संवेदनशील क्षेत्रों में विभागीय निरीक्षण कितने नियमित हैं और प्राप्त सूचनाओं के आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई अपने आप में आबकारी विभाग की लापरवाही या मिलीभगत का प्रमाण नहीं है। इस संबंध में निष्कर्ष संबंधित रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

 

85 अधिकृत दुकानों के बावजूद अवैध बिक्री की शिकायतें
मंदसौर जिले में करीब 85 अधिकृत मदिरा दुकानों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाए जा रहे हैं कि इनके अतिरिक्त भी कुछ गांवों और बस्तियों में शराब की बिक्री होती है। कुछ स्थानों पर डायरियों अथवा उधारी के हिसाब से शराब बेचने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। यदि अधिकृत दुकानों के बाहर अनधिकृत बिक्री हो रही है, तो शराब की आपूर्ति के स्रोत और इसमें शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई करना जरूरी है। इसके साथ ही सीतामऊ, गरोठ और भानपुरा सहित विभिन्न क्षेत्रों में निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर शराब बेचे जाने की शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए। मूल्य सूची, बिक्री रिकॉर्ड और निरीक्षण संबंधी दस्तावेजों की जांच से ओवररेटिंग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। शिकायतों की पुष्टि होने पर संबंधित दुकान संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

जहरीली शराब का खतरा, समन्वित कार्रवाई जरूरी
अवैध शराब का कारोबार केवल नियमों के उल्लंघन अथवा राजस्व के नुकसान का विषय नहीं है। संदिग्ध गुणवत्ता वाली शराब लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए अवैध शराब के संभावित स्रोतों की पहचान, नमूनों की जांच और आपूर्ति शृंखला पर कार्रवाई को प्राथमिकता देना जरूरी है। कलेक्टर के दोनों पत्रों से स्पष्ट है कि प्रशासन पुलिस, आबकारी, राजस्व और पंचायत स्तर पर समन्वय बढ़ाना चाहता है। अब चुनौती इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की है।

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