’’आपराधिक प्रकरणों के अनुसंधान में पुलिस के साथ खुद को अपडेट रखने की आवश्यकता हैं’’ ई-साक्ष्य विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न।
Madhya Pardesh / नीमच। लोक अभियोजन संचालनालय, मध्यप्रदेश भोपाल के तत्वाधान में जिला नीमच के अभियोजन अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारीयों की विषय ई-साक्ष्य एवं आपराधिक प्रकरणों में विवेचना के विषय पर व्यावसायिक दक्षता संवर्धन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन पुलिस कन्ट्रोल रूम, नीमच में श्री दुष्यंत सिंह रावत, सहायक निदेशक अभियोजन, जिला नीमच के कुशल नेतृत्व में किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्दैश्य विवेचना में ई-साक्ष्य एकत्रित कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना तथा इस संबंध में अभियोजन अधिकारीगण एवं पुलिस अधिकारीगण का दक्षता संवर्धन किया जाना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथिगण श्रीमान् विरेन्द्र सिंह राजपूत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला नीमच, राजेश व्यास (भा. पु. से.) पुलिस अधीक्षक, जिला-नीमच, श्रीमती हेमलता अग्रवाल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला नीमच तथा श्री बी. एस. ठाकुर, प्रभारी उपसंचालक अभियोजन, जिला नीमच थे। अतिथिगण द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के पश्चात् सभी अतिथिगण का पुष्पगुच्छ से स्वागत कर किया गया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विरेन्द्र सिंह राजपूत, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय, जिला नीमच द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि पुलिस की विवेचना के दौरान जो कमीया रह जाती हैं, उसको किस प्रकार से दूर किया जा सकता हैं। पुलिस द्वारा जो अभियुक्तगण का मेमोरेण्डम लिया जाता हैं, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के नवीन मार्गदर्शक सिद्धांतो का पालन किये जाने हेतु कहा गया। महत्वपूर्ण एवं गंभीर अपराधों में डी.एन.ए. परीक्षण कराया जाना चाहिए एवं ऐसे मामलों में उच्च कोटी का अनुसंधान किया जाना चाहिये। ई-साक्ष्य को एकत्रित किये जाने एवं उसकी प्रति अधिवक्तागण व पक्षकारों को प्रदान किये जाने के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राजेश व्यास, पुलिस अधीक्षक, जिला नीमच द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि तीन नये आपराधिक कानूनों की आवश्यकता क्यो हुई। पुलिस विवेचना के दौरान ई-साक्ष्य एवं टैक्नोलोजी बढाने पर जोर देना पड़ेगा, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर विश्वसनीयता बढ़ेगी। भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया गया कि पुलिस द्वारा भी अपराधों एवं विवेचना से संबंधीत सारगर्भिम डेटा का संग्रहण किया जा रहा हैं, जिसको आर्टीफीशीयल इंन्टलीजेंस के माध्यम से ए.आई. ऐजेन्ट का निर्माण कर विवेचना एवं अपराध की रोकथाम में उसका उपयोग किया जायेगा। पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारीगण को टैक्नोलोजी के संबंध में संबोधित करते हुवे कहा गया कि ’’टैक्नोलोजी कुत्ते की तरह होती हैं, आप उससे जितना डरोगो वह उतना आपको डरायेगी, यदि आप बिना डरे उसे समझकर मित्रवत् होंगे वह उतनी ही आपके लिये मददगार व वफादार होगी’’
कार्यक्रम की अतिथि श्रीमती हेमलता अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला नीमच द्वारा अपने उद्बोधन में ई-साक्ष्य के बारें में जानकारी देते हुवे कहा गया कि पुलिस अधिकारीगण को निरंतर ई-साक्ष्य के बारे में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा हैं व डी.जी.पी. महोदय द्वारा भी इसकी निरंतर मोनीटरींग की जा रही हैं। कार्यशाला की उपयोगिता के बारे में कहा गया कि पूर्व में जो भी प्रशिक्षण पुलिस अधिकारीगण द्वारा प्राप्त किया गया हैं, यह कार्यशाला उसमें धार लगाने का कार्य करेगी।
कार्यक्रम में ई-साक्ष्य विषय पर प्रशिक्षण प्रदान किये जाने हेतु आये मास्टर ट्रैनर श्री रौनक पाटीदार, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, मनासा द्वारा अपने उद्बोधन में ई-साक्ष्य के संबंध में मध्यप्रदेश शासन के नये नियमों की जानकारी दी गई तथा इन नियमों को पालन विवेचना एवं विचारण के दौरान किस प्रकार से किया जाये इस संबंध में जानकारी प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त सत्र के अंत में सीसीटीएनएस प्रभारी श्रीमती दीपाली चौबे द्वारा सीसीटीएनएस की कार्यप्रणाली की बारे में विस्तार से समझाया गया तथा विवेचना के दौरान इसका कैसे उपयोग किया जाये यह भी बताया गया।
कार्यशाला के प्रारंभ में स्वागत भाषण विवके सोमानी, विशेष लोक अभियोजक, एट्रोसीटी एक्ट, नीमच द्वारा दिया गया। समापन सत्र में श्रीमती हेमलता अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला नीमच एवं बी. एस. ठाकुर, प्रभारी उपसंचालक अभियोजन, जिला नीमच द्वारा सहभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम का सफल संचालन पारस मित्तल, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी नीमच द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिले सभी अभियोजन अधिकारी, कर्मचारी एवं पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।