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मध्यप्रदेश में 13 से 15 जुलाई तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे पटवारी, 32 हजार पटवारियों ने सरकार के खिलाफ किया आंदोलन का ऐलान

मध्यप्रदेश में 13 से 15 जुलाई तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे पटवारी, 32 हजार पटवारियों ने सरकार के खिलाफ किया आंदोलन का ऐला

भोपाल ।मध्यप्रदेश के करीब 32 हजार पटवारियों ने विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया है। प्रदेशभर के पटवारी 13 जुलाई से 15 जुलाई तक तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे, जिससे राजस्व विभाग के कामकाज पर असर पड़ सकता है। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने आरोप लगाया है कि वर्षों से लंबित मांगों पर शासन कोई ठोस निर्णय नहीं ले रहा है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि 1998 के बाद से अब तक न तो वेतन पुनरीक्षण किया गया, न कैडर रिव्यू हुआ और न ही नियमित पदोन्नति दी गई। इससे पूरे पटवारी संवर्ग में भारी नाराजगी है। संघ ने प्रदेशभर के कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम

ज्ञापन सौंपना शुरू कर दिया है। साथ ही 12 जुलाई को भोपाल में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाकर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।

चार दिन का अल्टीमेट

पटवारी संघ ने सरकार को चार दिन का समय देते हुए कहा है कि यदि लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 13 से 15 जुलाई तक सामूहिक अवकाश रहेगा। इसके बाद आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिलने का आरोप

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र बाघेल का कहना है कि संगठन कई वर्षों से अपनी मांगें शासन के सामने रखता आ रहा है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि अन्य विभागों के कर्मचारियों को लगातार पदोन्नति और सेवा लाभ मिल रहे हैं, जबकि पटवारियों की समस्याएं लगातार नजरअंदाज की जा रही हैं।

शासन पर भेदभाव का आरोप

मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेश संवाद समिति अध्यक्ष राजीव जैन ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पटवारियों ने एकजुट होकर ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते न्यायोचित मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इससे होने वाले किसी भी प्रशासनिक व्यवधान की जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

पटवारियों की प्रमुख मांगें

पटवारी संघ ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। पहला कैडर रिव्यू लागू कर नियमित पदोन्नति और समयमान वेतनमान दिया जाए। जब तक कैडर रिव्यू नहीं होता, तब तक पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों को

समयमान वेतनमान का लाभमिलमा दूसरा बनायाब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र कराई जाए। संघ का कहना है कि पिछले 23 वर्षों में केवल एक बार, वर्ष 2019 में परीक्षा आयोजित हुई थी। तीसरा पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में शामिल किया जाए। संघ का कहना है कि राजस्व मामलों में अंतिम निर्णय तहसीलदार या नायब तहसीलदार लेते हैं, लेकिन कई मामलों में सीधे पटवारियों पर एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। चौथा लंबित मानदेय और भुगतान तत्काल किया जाए। संघ के अनुसार स्वामित्व योजना, कृषि गणना, लघु सिंचाई गणना, फार्मर आईडी शिविर सहित कई सरकारी ि योजनाओं में निजी संसाधनों से काम कराने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया है। पांचवां संघ पदाधिकारियों के स्थानांतरण निरस्त किए जाएं। संघ का आरोप ि है कि कर्मचारी हितों की आवाज उठाने वाले पदाधिकारियों का स्थानांतरण स्थानांतरण नीति के विपरीत किया गया है।

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