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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मानदेय बहाल; एरियर मिलेगा, ब्याज नहीं

जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को वर्ष 2019 से पूर्व की मानदेय व्यवस्था बहाल रखने और बकाया राशि (एरियर) का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, एरियर पर ब्याज देने के एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अंशदान बढ़ाए जाने का लाभ कार्यकर्ताओं को मिलना चाहिए था। राज्य सरकार अपने हिस्से के अंशदान में कटौती कर बढ़े हुए मानदेय का लाभ नहीं रोक सकती।

अदालत ने स्पष्ट किया कि तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा घोषित ₹3,000 मानदेय वृद्धि प्रभावी रहेगी। इसके तहत वर्ष 2019 से 2023 तक की बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। अनुमानित रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को करीब ₹1.20 लाख और सहायिकाओं को करीब ₹63 हजार का एरियर मिलेगा। पात्र हितग्राहियों को ग्रेच्युटी का लाभ भी दिया जाएगा।

खंडपीठ ने 3 फरवरी 2026 को एकलपीठ द्वारा दिए गए एरियर भुगतान के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन यह कहा कि ब्याज देने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है, इसलिए ब्याज संबंधी आदेश रद्द किया जाता है।

इस फैसले से प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को राहत मिली है, जबकि राज्य सरकार को केवल ब्याज के वित्तीय भार से आंशिक राहत प्राप्त हुई है।

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