नाग पंचमी पर उज्जैन में महाकाल मंदिर के शिखर पर स्थितनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन करने के लिए भक्तों का उत्साह, शुक्रवार रात 12 बजे तक पट खुले रहेंगे।
Madhya Pardesh// उज्जैन। मध्यप्रदेश, नाग पंचमी पर उज्जैन में महाकाल मंदिर के शिखर पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट गुरुवार रात 12 बजे खोल दिए गए। सबसे पहले श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर नीरज कुमार ने ने त्रिकाल पूजा की।
साल में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन करने के लिए भक्तों का उत्साह देखने को मिला। गुरुवार रात 12 बजे इसके पट खुले, जो शुक्रवार रात 12 बजे तक खुले रहेंगे। हालांकि रात 10 बजे ही भक्तों का प्रवेश बंद कर दिया जाएगा, जिससे समय पर गेट बंद करने में समस्या न हो। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी शुक्रवार को सुबह नागचंद्रेश्वर मंदिर का वीडियो और फोटो जारी किया है। आप भी इस वीडियो को देख भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकते हैं।
सीएम मोहन यादव की एक्स पर पोस्ट
10 लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान
एक घंटे चली त्रिकाल पूजा और भोग लगाने के बाद आम लोगों को दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश दिया गया। दर्शन के लिए गुरुवार रात 10 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। पट खुलने के बाद रात 1 बजे से दर्शन शुरू हो गए। सुबह साढ़े 10 बजे तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर चुके हैं। 24 घंटे में 10 लाख श्रद्धालुओं के महाकाल मंदिर में आने का अनुमान है।
11वीं शताब्दी की प्रतिमा नेपाल से आई थी
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के गर्भगृह के ऊपर ओंकारेश्वर मंदिर है। उसके शीर्ष पर नागचंद्रेश्वर का मंदिर है। मंदिर में 11वीं शताब्दी की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में नाग देवता की मूर्ति फन फैलाए हुए मुद्रा में है। उनके ऊपर शिव-पार्वती विराजमान हैं। नागचंद्रेश्वर इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां विष्णु भगवान की जगह भगवान शिवसर्प शय्या पर सवार हैं। यह प्रतिमा नेपाल से उज्जैन लाई गई थी। मान्यता है कि उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में त्रिकाल पूजा की परंपरा है। पट खोलने के साथ ही प्रथम पूजा के बाद शुक्रवार को दोपहर में 12 बजे प्रशासन के अधिकारी भगवान नागचंद्रेश्वर का पूजन करने वाले हैं। शाम 7.30 बजे महाकाल की संध्या आरती के बाद महाकाल मंदिर समिति की तरफ से महाकाल के पुजारी नागचंद्रेश्वर की पूजा करने आएंगे। शुक्रवार रात 12 बजे एक बार फिर सालभर के लिए इस मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।