फर्जी हितग्राहियों को अंत्येष्ठी एवं अनुग्रह राशि का भुगतान-17 अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस द्वारा मामला दर्ज
भोपाल। नगर निगम भोपाल- 17 अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया है। सभी के विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र, बेईमानी, दस्तावेजों की कूटरचित और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप है।
जोन-14 के तत्कालीन जोनल अधिकारी सत्यप्रकाश बडगैया, जोन-4 के तत्कालीन जोनल अधिकारी परितोष रंजन, जोन-11 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अवध नारायण मकोरिया, जोन-19 के तत्कालीन जोनल अधिकारी मयंक जाट, जोन-9 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अभिषक श्रीवास्तव, जोन-3 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अनिल कुमार शर्मा, जोन-20 के तत्कालीन जोलन अधिकारी सुभाष जोशी, जोन-17 के जोनल अधिकारी मृणाल खरे, वार्ड-35 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी अनिल प्रधान, वार्ड-69 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी चरण सिंह खंगराले, वार्ड-36 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी शिवकुमार गोफनिया, वार्ड-77 के वार्ड प्रभारी सुनील सूर्यवंशी, वार्ड-17 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी मनोज राजे, वार्ड-31 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी कपिल कुमार बंसल, जोन-9 के कम्प्यूटर ऑपरेटर सुधीर शुक्ला, जोन-18 के कर्मचारी नवेद खान, वार्ड-77 के 29 दिवसीय कर्मचारी रफत अली एवं अन्य।
भोपाल लोकायुक्त और नगर निगम की प्रारंभिक जांच में 118 संदिग्ध प्रकरण की जांच की गई। इसमें सिर्फ 23 के ही दस्तावेज मिले। इसकी जांच में सामने आया कि 8 से 9 लोगों के जिंदा होने के बावजूद उनके पहले फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए और कर्मकार मंडल में पंजीकृत मजदूरों को मृत्यु पर शासन की तरफ से मिलने वाले अंत्येष्टि के 6 हजार रुपये और अनुदान के 2 लाख रुपये की राशि किसी दूसरे के नाम पर निकाल ली गई।
अब तक क्या-क्या गड़बड़ी मिली
- जोनल अधिकारियों ने अपने जोन के अलावा दूसरे जोन के हितग्राहियों का ऑनलाइन लॉगइन कर यानी डीएससी से भुगतान किया।
- भुगतान से पहले हितग्राही का आवेदन एवं उससे संबंधित अभिलेख प्राप्त कर नियमानुसार वार्ड प्रभारी से मृत्यु प्रमाण पत्र, हितग्राही का पता, बैंक से संबंधित अभिलेख का सत्यापन एवं प्रतिवेदन प्राप्त किया जाना था, नहीं लिया गया।
- भुगतान से संबंधित निर्धारित नस्तियों का संधारण भी नहीं किया गया।
- कई प्रकरणों में दस्तावेजों में हेरफेर कर कूटरचित दस्तावेजों का निर्माण कर भुगतान किया जाना पाया गया।
- त्रुटिपूर्ण या गलत बैंक खातों में भुगतान किए गए।
- भवन संनिर्माण एवं कर्मकार मंडल ने भी प्रकरणों की जांच सही नहीं की।
- फर्जी हितग्राहियों को अंत्येष्ठी एवं अनुग्रह राशि का भुगतान किया, मृत घोषित मजदूर जीवित पाए गए
- कई श्रमिक एवं हितग्राही डॉक्यूमेंट में लिखे हुए एड्रेस पर मिले ही नहीं।