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सोयाबीन की फसल में जड़ सड़न रोग एवं सफेद लट का प्रकोप हो रहा, किसान भाईयों के लिए समसामयिक सलाह-कृषि विज्ञान केन्द्र, मन्दसौर मध्यप्रदेश

मन्दसौर। कृषि विज्ञान केन्द्र, मन्दसौर मध्यप्रदेश के वैज्ञानिकों ने भ्रमण के दौरान पाया गया कि सोयाबीन की फसल में जड़ सड़न रोग एवं सफेद लट का प्रकोप हो रहा है। डॉ. जी. एस. चुण्डावत वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केन्द्र, मन्दसौर मध्यप्रदेश ने प्रेस विज्ञप्ती मे किसान भाईयों के लिए समसामयिक सलाह देते हुए बताय की उपरोक्त रोग एवं कीट के प्रबंधन के लिए निम्नलिखित उपाय करने की सलाह दी जाती हैः-

सोयाबीन में जड़ सड़न रोगः- यह रोग एक भूमि जनित रोग है इसके प्रबंधन के लिए हेक्साकोनाजॉल 5 प्रतिशत एस.सी. की 1 लीटर मात्रा 500 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर करके जड़ों को तर (ड्रेन्च) करें।
सफेद लट का प्रबंधन :- सोयाबीन व अन्य फसलों में सफेद लट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। यह कीट भूमि में रहकर पौधों की जड़ों को काटकर नुकसान पहुंचता है। इस लट के व्यस्कों (भँवरों) को पकड़ने हेतु एक लाईट ट्रेप (प्रकाश प्रपंच) प्रति हेक्टेयर की दर से लगावे एवं प्रतिदिन सांयकाल 6 बजे से 10 तक चालू रखें। इस कीट के लट के नियंत्रण हेतु जैविक फफूंदनाशक मेटाराइजम एनीसोप्लेही 10 प्रतिशत दानेदार की 6 किलो ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में मिलावें या पूर्व मिश्रित रासायनिक कीटनाशक थाईमिथोक्साजाम 0.9 प्रतिशत $ फिप्रोनिल 0.2 प्रतिशत दानेदार की 12 किलो ग्राम की मात्रा या कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत सी.जी. की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर (100 आरी) की दर से खेत में मिलावें या फिप्रानिल 40 प्रतिशत $ इमिडाक्लोप्रिड 40 प्रतिशत घुलनशील दानेदार की 250 ग्राम मात्रा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर करके पौधों के ऊपर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करे।
तना मक्खीः- तना मक्खी का प्रकोप सोयाबीन फसल के 14-15 दिनों की होने पर प्रारम्भ होता है। इस कीट के कारण पौधों का तना खोखला हो जाता है। जिससे पौधों में पोषक तत्वों की पूर्ती नहीं हो पाती है एवं पौधें मर जाते है। इस मक्खी के नियंत्रण के लिए पूर्व मिश्रित थाईमिथोक्साजाम 12.60 प्रतिशत $ लैम्डासांयहेलोथ्रीन 9.50 प्रतिशत की 125 मिली मात्रा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर करके पौधों के ऊपर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

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