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भगवान अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ की शाही पालकी में उमड़ा आस्था का सैलाब, झांकियों और नासिक ढोल ने मोहा मन/दो दिवसीय श्रावण महोत्सव का भव्य समापन

Madhya Pardesh / मंदसौर। भगवान अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ की शाही पालकी यात्रा में सोमवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा को शाही पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। यात्रा में कावड़ यात्रियों सहित हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पालकी का स्वागत कर भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन किए।
आकर्षण का केंद्र बनीं भव्य झांकियां
शाही पालकी यात्रा में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संदेशों से जुड़ी आकर्षक झांकियां और ट्रॉले शामिल किए गए। खाटू श्यामजी, राधा-कृष्ण रास, कमल का फूल, श्री महाकाल-रावण, महाकाल पालकी और अघोरी ग्रुप की झांकियां श्रद्धालुओं एवं शहरवासियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं।
नासिक ढोल, शहनाई और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बढ़ाया उत्साह
शाही पालकी में बैंड-बाजे, नासिक ढोल और शहनाई की प्रस्तुतियों से पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आया। युवतियों के नृत्य और अलग-अलग शहरों से आए कलाकारों के शानदार करतबों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यात्रा के मार्ग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भक्ति गीतों एवं जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।
इन प्रमुख मार्गों से गुजरी पालकी
शाही पालकी यात्रा पशुपतिनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर वीर सावरकर पुलिया, धान मंडी, शुक्ला चौक, नयापुरा रोड, गोल चौराहा, बीपीएल चौराहा, गांधी चौराहा, नेहरू बस स्टैंड, भारत माता चौराहा, घंटाघर और मंडी गेट सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। इसके बाद देर शाम पालकी पुनः पशुपतिनाथ मंदिर परिसर पहुंची।
रात 8 बजे शयन आरती के साथ हुआ समापन
शाही पालकी यात्रा का समापन करीब रात 8 बजे पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में हुआ। यहां शयन आरती एवं विसर्जन के साथ यात्रा संपन्न हुई। यात्रा को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा।

दो दिवसीय श्रावण महोत्सव का भव्य समापन, शिवमय हुई पशुपतिनाथ मंदिर परिसर की सांस्कृतिक संध्या

मंदसौर। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अधीन त्रिवेणी कला संग्रहालय, उज्जैन द्वारा श्रावण माह के पावन अवसर पर भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर, मंदसौर में आयोजित दो दिवसीय ‘श्रावण महोत्सव’ का सोमवार को भव्य समापन हुआ। 16 एवं 17 अगस्त को आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

महोत्सव का शुभारंभ रविवार शाम 7 बजे भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। प्रथम दिवस की सांस्कृतिक संध्या में श्री मुकेश शास्त्री एवं साथी, उज्जैन ने डमरू वादन की प्रस्तुति दी। इसके बाद सन्नाली शर्मा एवं साथी, मंदसौर द्वारा ‘गंगावतरण’ पर आधारित कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया। भावपूर्ण नृत्य, संगीत और पारंपरिक शैली के माध्यम से कलाकारों ने गंगावतरण के प्रसंग को जीवंत कर दिया।

नाचना और टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है

इसके पश्चात कला चौपाल एवं साथी, उज्जैन द्वारा ‘महादेव लीला-नाट्य’ की प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने सशक्त अभिनय, संवाद, संगीत एवं पारंपरिक नाट्य शैली के माध्यम से भगवान शिव से जुड़े प्रसंगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। दर्शकों ने सभी प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

महोत्सव के दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या में मनोज बावरा एवं साथी, इंदौर द्वारा ‘वाद्य वृन्दकृशिव केन्द्रित राग’ की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद सुधा गुप्ता बोरलिया एवं साथी, उज्जैन ने भक्ति गायन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं ‘श्री शिव लीला-नाट्य’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को भगवान शिव की लीलाओं से रूबरू कराया। लीला-नाट्य का निर्देशन श्रीरामचन्द्र सिंह, भोपाल द्वारा किया गया।

नाचना और टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है

कार्यक्रम का संचालन देवकृष्ण वैष्णव ने किया। समापन अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी एवं पदेन सचिव, श्री पशुपतिनाथ मंदिर, शुभम पाटीदार ने आभार व्यक्त किया।

दो दिवसीय श्रावण महोत्सव में कला, संगीत, नृत्य और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भगवान पशुपतिनाथ की नगरी में आयोजित इस सांस्कृतिक आयोजन ने श्रावण माह की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को और समृद्ध किया।

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